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शरद पूर्णिमा कल, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अपनाएं ये उपाय

BY -
Ranchi Bureau
Ranchi Bureau
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 1:59:23 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है. इस वर्ष 19 अक्टूबर यानि मंगलवार को शरद पूर्णिमा है. बता दें कि शरद पूर्णिमा को कोजागरा भी कहते हैं. झारखंड में यूं तो कई समुदाय इसे मनाते हैं, पर मैथिल और बंगाली समुदाय में यह त्यौहार खासतौर पर मनाया जाता है.

देखती हैं मां, कौन जाग रहा

शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की अराधना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी भ्रमण के लिए निकलती हैं. भक्त सुशील झा कहते हैं कि कोजागरा यानि को जाग रहा. मां लक्ष्मी इस शाम घूमने निकलती हैं, और जो भक्त रात में शयन करने की जगह जाग कर उनकी अराधना कर रहा होता है, उसे अपना आशीष देती हैं. वहीं संचिता बोस कहती हैं कि हमारे यहां दीवाली से अधिक महत्व कोजागरा यानि लक्खी पूजा का है. हम इस दिन विधि विधान से पूजा करते और शाम को परिचितों को प्रसाद ग्रहण करने के लिए घर बुलाते हैं.

ज्योतिष में महत्वपूर्ण

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का खास महत्व है. ज्योतिष डॉ रचना कुमारी कहती हैं कि इस दिन चांद पृथ्वी के निकट होता है. पूर्णिमा के दिन चांद सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन आकाश से अमृत की वर्षा होती है. इसी कारण खीर बना कर पूर्णिमा की रात खुले में रखने की परंपरा है. ऐसा माना जाता है कि चांद की रोशनी में खीर रखने से वह अमृत समान हो जाता है.

कब से कब तक है पूर्णिमा की तिथि –

शरद पूर्णिमा इस वर्ष 19 अक्टूबर शाम सात बजे से 20 अक्टूबर रात आठ बज कर बीस मिनट तक रहेगा.  अपनी सुविधा और मान्यता के अनुसार इस बीच में त्यौहार के विधि विधान पूरे किए जा सकते हैं.

ऐसे करें पूजा –

शरद पूर्णिमा के दिन नहा कर साफ कपड़े धारण करें. पूजा के समय मां लक्ष्मी को गंध, पुष्प, अक्षत, तांबूल (पान), दीप, धूप, सुपारी और दक्षिणा अर्पित करें. इस दिन गाय के दूध की खीर जरूर बनाएं. रात में मां को इसका भाग लगा कर चांद की रोशनी में रख दें. दूसरे दिन इस प्रसाद को ग्रहण करें. ध्यान रखें कि इसदिन भूल कर भी काले कपड़े नहीं पहनें.

Tags:News

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