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जमीन विवाद के कारण गिरिडीह का कार्तिक महतो बना नक्सली, 12 साल बाद बेटी के सुझाव पर माओवादी संगठन से हुआ अलग

BY -
Ranchi Bureau
Ranchi Bureau
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 11, 2026, 8:56:43 PM

गिरिडीह (GIRIDIH) : जमीन विवाद के कारण रिश्तेदारों को सबक सीखाने को लेकर नक्सली बना था. पर जब बिटिया ने बंदूक छोड़ने की बात कही तो माओवादी संगठन से अलग हो गया. यह बात कही एक लाख के इनामी हार्डकोर नक्सली कार्तिक महतो ने. पुलिस लाईन में एक कार्यक्रम के दौरान 58 वर्षीय कार्तिक महतो ने  गिरिडीह पुलिस के सामने शनिवार को संरेडर किया.

यह थी रणनीति

समाज के मुख्यधारा से जुड़ने का स्वागत भी एसपी अमित रेणु, सीआरपीएफ 154वीं बटालियन के कमांडेट अच्यूतानंद, एएसपी गुलशन तिर्की, सहायक कमांडेट अजय कुमार और डुमरी एसडीपीओ मनोज कुमार ने बुके देकर किया. इस दौरान अधिकारियों ने संरेडर किए इनामी माओवादी से अपील की कि अगर कोई और नक्सली संरेडर करता है तो मुख्यधारा से जुड़ने पर उसका भी राज्य पुलिस इसी तरह स्वागत करेगी और जीने की एक राह दिखाएगी. पुलिस लाईन में ही प्रेसवार्ता के दौरान एसपी रेणु और कमांडेट अच्यूतानंद ने कहा कि जिले के अलग-अलग नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन का दबाव और आत्मसमर्पण नीति ने गिरिडीह के खुखरा थाना क्षेत्र के जिलिंगटांड गांव निवासी कार्तिक महतो को माओवादी संगठन से मोहभंग कर संरेडर के लिए मजबूर किया.

समाज की मुख्य धारा में खींच लाई बिटिया

एसपी ने प्रेसवार्ता के दौरान स्पस्ट किया कि कार्तिक महतो साल 2009 में जमीन विवाद के कारण माओवादी संगठन से जुड़े थे. पीरटांड और डुमरी इलाके के कई हार्डकार माओवादियों के दस्ते से जुड़े थे.यही नहीं पीरटांड के जोनल कमांडर और सैक स्पेशल एरिया कमेटी के सदस्य अजय महतो के दस्ते से जुड़े थे.  एसपी ने यह भी बताया कि कार्तिक महतो के खिलाफ छह केस दर्ज हैं. इनमें अधिकांश मामले 17 सीएलए के आम्र्स एक्ट के तहत दर्ज हैं.  साल 2018 में पीरटांड में चिरकी से लेकर हरलाडीह तक सड़क निर्माण कंस्ट्रक्शन कंपनी गणेश कंस्ट्रक्शन के स्टोर कैंप में आग लगाने और कंपनी के मुंशी से मारपीट तक का नक्सली केस थाना कांड संख्या 11/18 दर्ज हैं. एसपी ने यह भी बताया कि संरेडर करने वाले हार्डकोर माओवादी कार्तिक महतो के चार बच्चे हैं. इसमें तीन बेटे और एक बेटी. बेटी ने ही पिता के समाज से जुड़ने में महत्पूर्ण भूमिका निभायी. बताया कि कार्तिक महीनों के लिए यह राज्य से बाहर चला गया. वहां से लौटने के बाद बेटी ने अपने नक्सली पिता को संरेडर करने का सुझाव दिया. इधर कार्यक्रम के दौरान कार्तिक महतो को जहां संरेडर नीति के तहत एक लाख का चेक सौंपा गया. इसी नीति के तहत अब राज्य सरकार द्वारा तीन लाख की राशि के साथ कई और सुविधाएं भी दी जाएंगी. 

रिपोर्ट : दिनेश कुमार,गिरिडीह 

Tags:News

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