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सरकारी आदेश नहीं मानने पर 77 निजी स्कूलों को शोकॉज नोटिस, 4 किस्तों में पूरा फीस जमा कराने पर अड़े हैं स्कूल संचालक

सरकारी आदेश नहीं मानने पर 77 निजी स्कूलों को शोकॉज नोटिस, 4 किस्तों में पूरा फीस जमा कराने पर अड़े हैं स्कूल संचालक

धनबाद (DHANBAD) हम है धनबाद के पब्लिक स्कूल ,नहीं मानेंगे सरकार का आदेश शायद,यही बात चल रही है धनबाद के स्कूल संचालको के मन में अगर ऐसी बात नहीं होती तो क्या वे धनबाद जिला शिक्षा विभाग के पत्रों का समय पर जवाब नहीं देते.मामला यह है कि यहाँ के  ब्लिक स्कूल झारखण्ड सरकार के आदेश को मानने के मूड में नहीं है.सरकार ने यह आदेश दे रखा है कि टूयूशन फीस के अलावा कोई शुल्क बच्चो से न लिया जाय.लेकिन धनबाद में तो कोरोनाकाल से पहले की तरह फीस बेधड़क लिया जा रहा है. जो बच्चे फीस देने में लाचार है,उन्हें परीक्षा में नहीं बैठने दिया जा रहा है.इन्ही सब मामलो को लेकर जिला प्रशासन ने पब्लिक स्कूलों को पत्र लिखा गया था.लेकिन कई स्कूलों ने तो एक नहीं,कई पत्रों का जवाब तक समय पर नहीं दिया.जब स्कूलों की तरफ से कोई सुगबुगाहट नहीं दिखाई गई तो  66 सीबीएसइ और 11 आईसीएसई स्कूलों को विभाग ने शोकॉज किया है.शोकॉज में कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा गया है.जवाब नहीं आने पर नियमानुसार कड़ी करवाई की जाएंगी.तब जाकर इन स्कूलों ने अपना जवाब भेजा.  

लाचार दिख रहे हैं अभिभावक  

अभिभावकों के समक्ष परेशानी है कि वे करे तो क्या करे.उन्हें पिछले वर्ष के कोरोनकाल के दौरान जब स्कूल बंद रहें उसका ट्यूशन फीस और अन्य वार्षिक शुल्क मांगा जा रहा है.कहा जा रहा कि आप क़िस्त के आधार पर चार किस्तों में पैसा दीजिये.लेकिन हर हाल में पैसा देना पड़ेगा.शिक्षकों के वेतन और अन्य भुगतान के लिए ये राशि देनी पड़ेगी.अब अभिभावकों की परेशानी ये है कि स्कूल प्रबंधन उनकी सुनता नहीं है.बच्चो के नामांकन से लेकर पढ़ाई पूरी करने तक अभिभावको को दुधारू गाय मानकर दूहा जाता है.किताब कहा से लेना है ,ड्रेस कहाँ से लेना है ,यह सब स्कूल प्रबंधको की मर्जी से ही होता है.विद्यालय में अगर कोई बिशेष आयोजन होता है. तो इसका खर्च भी अभिभावको के माथे पर ही डाल दिया जाता है.बच्चो की पढ़ाई सुचारु रखने के लिए अभिभावक चुप चाप अपना पेट काट कर भी बर्दाश्त करते रहे है. लेकिन कोरोना काल में जब उनकी ही आमदनी घट गई और घर चलना मुश्किल हो गया तो बच्चो की फीस वे कहाँ से दे पाते.फीस बकाया बढ़ता गया लेकिन स्कूल वाले बिना रहम खाये पूरी राशि मांग रहे है. बच्चो के भविष्य को लेकर अभिभावक सामने आने से बच रहे है.लेकिन अंदर ही अंदर उबल रहे है. दरअसल स्कूल प्रबंधनों में अब सेवा भाव लापता है ,पढ़ाई को एक व्यवसाय की तरह कमाने का जरिया बना लिया है.अभिभावक महासंघ की बातो पर भरोसा करे तो अगर सरकार  या प्रशासन अपनी देख रेख में स्कूलों का ऑडिट करा दे तो पता चल जाएगा की पढ़ाई की आड़ में पैसो का कैसे कैसे बदरबाँट किया जाता है.

क्या है सरकार  का आदेश

झारखण्ड सरकार ने 25 जून '20 को पारित आदेश में कहा था कि कोई भी पब्लिक स्कूल बच्चो से टूयशन फीस के अलावा कोई अन्य चार्ज नहीं लेंगे.सभी अधिकारयो  को ऐसे सख़्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया था.इधर स्कूलों में अपनी फरियाद लेकर रोज परेशान अभिभावक पहुंच रहे है.लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती. इस मामले को लेकर The news post के ब्यूरों हेड अभिषेक कुमार सिंह ने  सहोदया (सीबीएसई) के क्षेत्रीय पदाधिकारी केसी श्रीवास्तव और धनबाद के प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल डीएवी कोयलानगर के प्राचार्य एन एन श्रीवास्तव और जिला शिक्षा अधीक्षक इन्द्रभूषण सिंह से पक्ष जानने के बाद इस मुद्दे पर झारखंड अभिभावक महासंघ के महासचिव मनोज मिश्रा से ख़ास बातचीत की ....

 

Published at:25 Sep 2021 03:42 PM (IST)
Tags:News
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