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घर की दहलीज लांघ स्वाबलंबन की राह पर कदम बढ़ा रही संताल की महिलाएं, PAD WOMEN नाम से मिल रही ख्याति

BY -
Ranchi Bureau
Ranchi Bureau
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 11:24:55 AM

दुमका ( DUMKA) - वर्ष 2018 में एक फिल्म बनी थी पैडमैन. आर. बाल्की के निर्देशन में बनी इस फिल्म के नायक थे अक्षय कुमार. रुपहले पर्दे पर अक्षय कुमार अपनी पत्नी की मेंस्ट्रूअल हाइजीन के मुद्दे को लेकर इतना ज्यादा विचलित हो जाते हैं कि इस समस्या का निवारण करने के लिए खुद सेनेटरी पैड बनाने की ठान लेते हैं.
   रील लाइफ में अक्षय कुमार के कार्यों को काफी सराहना मिली, लेकिन हम बात कर रहे हैं उपराजधानी दुमका के PAD WOMEN की, जो सखी मंडल से जुड़कर सेनेटरी पैड का निर्माण कर ना केवल महिलाओं की स्वास्थ्य का संवाहक बन रही है बल्कि घर की दहलीज लांघ कर स्वाबलंबन की राह पर कदम बढ़ा चुकी है.

सेनेटरी पैड उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता  जागरूकता उद्देश्य

दुमका के बंदरजोड़ी मोहल्ला में एक रूम में बैठी महिलाओं का यह समूह सहयोगी हाथ सखी मंडल की सदस्य है जो स्त्री स्वाभिमान नाम से सेनेटरी पैड का निर्माण कर रही है. कल तक घर के अंदर चौका बर्तन कर समय व्यतीत करने वाली महिलाएं आज घर की देहरी लांघ कर स्वाबलंबन की राह पर कदम बढ़ा चुकी है. घरेलू कार्य निपटा कर प्रतिदिन ये महिलाएं यहां एकत्रित होती हैं और सामूहिक रुप से सेनेटरी पैड का निर्माण करती है. संस्था का उद्देश्य है ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों को सस्ते दर पर सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के बारे में जागरूक करना.

आसान नहीं है राह

यह सत्य है कि उत्पादन की प्रत्येक इकाई रोजगार का सृजन करेगी, लेकिन दुमका की PAD WOMEN के लिए स्वाबलंबन की राह इतना आसान नहीं। महिलाएं सेनेटरी पैड का निर्माण तो कर रही है लेकिन प्रतिस्पर्धा के दौर में बाजार में अपनी पहचान नहीं बना पा रही है. जिस व्यवसाय में एक से एक धन्ना सेठ वर्षों से अंगद की तरह पैर जमाए बैठे हो उस व्यवसाय में इन घरेलू महिलाओं को अपने उत्पाद के लिए बाजार तैयार करना थोड़ा कठिन तो जरूर है. तभी तो ये महिलाएं जिला प्रशासन से बाजार मुहैया कराने की अपील कर रही हैं।

जिला प्रशासन से मदद की गुहार

सभी को सरकारी नौकरी देना किसी भी सरकार के बस की बात नहीं. सरकार कोई भी हो स्वरोजगार के सहारे स्वाबलंबन की बातें करती है. अब अगर दुमका की  महिलाएं स्वरोजगार के सहारे स्वाबलंबन की राह पर कदम बढ़ा चुकी है और राह में आने वाली बाधा को दूर करने के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगा रही है तो प्रशासन को भी चाहिए कि इनके मार्ग को प्रशस्त बनाने में सहयोग करें. प्रशासन के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है. प्रशासन के एक आदेश मात्र से स्त्री स्वाभिमान नामक सेनेटरी पैड जिले में संचालित तमाम महिला छात्रावास तक पहुंचाया जा सकता है और तभी महिलाएं स्वाभिमान के साथ अपना जीवन बसर कर सकती हैं.

रिपोर्ट :  पंचम कुमार झा, दुमका 

Tags:News

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