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राज्य में प्राथमिक से मैट्रिक तक हिन्दी और क्षेत्रीय भाषा की पढाई के लिए और नियोजन नीति के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगी भाजपा

BY -
Upendra Gupta
Upendra Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 5:02:18 PM

जमशेदपुर ( JAMSHEDPUR) झारखंड की नियोजन नीति झारखंड विरोधी और अव्यवहारिक है, जिससे झारखंड में रहने वाले किसी भी समुदाय को लाभ नही मिलने वाला है सिवाय एक समूदाय के, वो है मुस्लिम समाज . झारखंड के खतियान धारी और हिंदी भाषी छात्रों को सिरे से खारिज कर दिया गया है और उर्दू भाषा को माथे पर चढ़ा कर झामुमो कांग्रेस की सरकार ने केवल अपना वोट बैंक मजबूत करने का काम किया है. इसलिए भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य रमेश हांसदा ने हिंदी भाषा को शामिल करने और जनजातीय भाषा में प्राइमरी से मैट्रिक तक की पढ़ाई कराने हेतु झारखंड उच्च न्यायालय में रिट दायर करेंगे. आज भाजपा कार्यालय साकची में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा नेता रमेश हांसदा ने कहा कि झारखंड में अभी तक प्राथमिक स्तर से मैट्रिक तक सन्ताली , हो, मुंडारी, कुडुख, कुड़माली, खड़िया, खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया कि पढ़ाई नहीं हो रही है.यहां केवल उर्दू भाषा की पढ़ाई ही प्राथमिक स्तर पर होती है. उड़िया और बांग्ला की भी वही हालात है. बिना इन भाषाओं की पढ़ाई के हमारे बच्चे परीक्षा में फेल हो जाएंगे. आदिवासी नेता रमेश हांसदा ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी सरकार बचाने के लिए चुनाव में आदिवासियों से किया वादा भूल गए हैं और कांग्रेस के इशारे पर केवल उर्दू छात्रों को ही नियोजन नीति में लाभ दिलाने के लिए हिंदी को बाहर कर दिया. रमेश हांसदा ने दावा किया कि झामुमो और कांग्रेस के नेताओं के बच्चों को भी अगर नियोजन की परीक्षा में शामिल किया जाएगा तो वो भी फेल हो जायेंगे। रमेश हांसदा ने कहा कि किसी व्यक्ति का भाषा जानना और उस भाषा से परीक्षा देना दोनों अलग-अलग बातें होती है1झारखंड के आदिवासी अपनी भाषा अभी बोलते हैं, प्राइमरी स्तर पर पढ़ाई नहीं के कारण उस विषय पर परीक्षा  देना न्याय संगत नहीं है । भाजपा नेता रमेश हांसदा ने कहा कि भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी होकर भी पांचवी अनुसूचि को मानते हुए जिला स्तर की बहाली कराई जिससे यहां के लोगों को लाभ हुआ और झामुमो क्षेत्रीय पार्टी होकर चुनावी वादों को दरकिनार कर यहां के युवाओं को ठगने का काम किया है. यदि कोई झारखंडी यहां का खतियानी है और उसका बेटा राज्य के बाहर पढता है तब उस परिस्थिति में उस बच्चे को उसका लाभ नहीं मिलेगा.
 बंगाली समुदाय से अभिजीत दत्त ने कहा कि बंगला भाषा की स्थिति भी काफी दयनीय है. अधिकतर लोग बच्चों को हिंदी या अंग्रेजी पढ़ा रहे है. उस परिस्थिति में बंगाली छात्र भी नौकरी पाने से वंचित रहेंगे. कुड़मी एकता मंच के महासचिव चिन्मय महतो ने कहा कि इस नियोजन नीति से कुड़मी समाज भी प्रभावित हो रहे है. अभी तक एक भी शिक्षक नहीं है औऱ न ही पढ़ाई हुई. उनके समाज के लोग भी प्रभावित होंगे. भाजपा नेता रमेश हांसदा ने कहा कि इसी के चलते जब तक क्षेत्रीय भाषा अपने मुकाम तक नहीं पहुंच जाता, तब तक हिंदी में परीक्षा होना जरूरी है. नियोजन नीति में हिंदी भाषा को शामिल करने और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई प्राइमरी से मैट्रिक तक करने के  लिए झारखंड हाई कोर्ट में रिट दायर करने जा रहे हैं.

रिपोर्ट : पीयूष,जमशेदपुर

Tags:News

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