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LOHARDAGA: पेशरार जंगल की हुसरू नदी से बालू का अवैध उठाव कर रहे दो हाइवा और एक जेसीबी जब्त

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 11:37:54 PM

लोहरदगा (LOHARDAGA): झारखंड में बालू उठाव प्रतिबंधित है. झारखंड सरकार ने एनजीटी/NGT (National Green Tribunal) की रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह निर्देश जारी किया था.  इस बीच पंचायत चुनाव को लेकर भी बालू उठाव को पूरी तरह से बंद रहा और अब तक बंद है. लेकिन बालू माफियाओं के बीच इसको लेकर कोई सुनवाई नहीं हो रही है. लगातार नदी-तालाबों से अवैध बालू उठाव के मामले सामने आते  रहे हैं. नया मामला लोहरदगा के पठारी क्षेत्र से सामने आया है. यहां से पुलिस ने पेशरार जंगल के हुसरू नदी से बालू उठाव कर रहे दो हाइवा और एक जेसीबी को जब्त किया है. हालांकि पूरे मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई. जंगल इलाकों की नदियों से बालू का उठाव चोरी चुपके करने के मामले पहले भी होने की संभावना जताई जा रही है. वन विभाग मामले की कार्रवाई में जुट गई है.

झारखंड में नहीं मिल रहा बालू, जानिए वजह

बालू घाटों की नीलामी नहीं हो सकी है. सरकार ने बीते मार्च में बालू घाटों की नीलामी कराने का एलान किया था, लेकिन तकनीकी वजहों से समय पर इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी. विधानसभा में मुद्दा भी उठा था तब सरकार ने बीते 9 मार्च को आधिकारिक तौर पर कहा था कि 15 दिनों के अंदर बालू घाटों का टेंडर हो जाएगा. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. इसके बाद 9 अप्रैल को राज्य में पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने से राज्य में सभी प्रकार के टेंडर पर रोक लग गई. हालांकि 31 मई तक पंचायत चुनाव भी हो गए. अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का आदेश. अब मानसून सीजन में 10 जून से लेकर 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू का उठाव नहीं किया जा सकेगा.

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दोगुने दाम में बिक रहा अवैध बालू, माफियाओं की बल्ले-बल्ले

विभिन्न जिलों में बालू घाटों का टेंडर नहीं किया गया है. वहीं पिछले दो सालों से आधिकारिक रूप बालू का खनन बंद है. लेकिन बालू माफिया जगह-जगह से अवैध उठाव कर बाजारों में मुंहमांगी कीमत पर बालू बेच रहे है. बात रांची की करें तो 15,000 रुपये हाइवा (600 सीएफटी) की कीमत बढ़ कर 22,000 रुपये तक पहुंच गयी है. इसी तरह 3,000 रुपये ट्रक (130 सीएफटी) की कीमत बढ़ कर 5,000 रुपये तक पहुंच गयी है.

मजदूर परेशान, लगा इन Projects पर ब्रेक

इसका नुकसान यह हो रहा कि तकरीबन 5 हजार करोड़ की सरकारी और प्राइवेट Construction Projects पर ब्रेक लगा दी है. आलम ये है कि रांची में स्मार्ट सिटी बनते-बनते थम ही गई. फ्लाईओवर की भी राह लोग तकते रह गए. गली-नाली तक का काम रुक गया है. सबसे बड़ा संकट 20 लाख से अधिक मज़दूरों के सामने खड़ा हो गया है. वो अकेले नहीं हैं. उनका परिवार है. जिनके पास रोटी की लाले पड़े हैं. इसकी चिंता करैन करेगा। सरकार ने रोजगार तो दिया नहीं लेकिन बालू उठाव पर रोक लगाकर छिन जरूर लिया.

रिपोर्ट: गौतम लेनिन, लोहरदगा

Tags:News

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