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क्या झारखंड में करीब 70 फीसदी खेतों में खेती नहीं हो सकेगी! जानिये इसके पीछे क्या है कारण

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 11:15:35 PM

रांची(RANCHI): झारखंड की हरियाली प्रसिद्ध है. लेकिन लहलहाती फसल और झूमते जंगल क्या अब महज कहानियों में रह जाएंगे. ऐसा सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है कि विकास के नाम पर जंगल तो कट ही रहे हैं, अब खेतों की उर्वरता के भी नष्ट होने की आशंका बताई जा रही है. इसकी पुष्टि सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट सीएसी (CSE) की ताजा रिपोर्ट भी करती है. जिसने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है.  रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में क्षरित भूमि के मामले में झारखंड पहले नंबर पर आ गया है. झारखंड में 68 प्रतिशत भूमि का क्षरण (Soil EROSION) हो रहा है. जबकि यहां की भौगोलिक स्थिति को कृषि (agriculture) के लिए अपार संभावनाएं वाली मानी जाती रही है. कृषि राज्य की रीढ़ रही है. यहां से चावल और सब्जियां आसपास के राज्यों में भेजी जाती है. सब्जियों के लिए कई राज्य इस पर निर्भर करते हैं. खासकर यहां हरी सब्जियों की पैदावार अच्छी होती है. लेकिन उक्त रिपोर्ट ने चिंता तो बढ़ा ही दी है.

 

रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग कारणों से देश में मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ रहा है. झारखंड में भूमि क्षरण (Soil EROSION) पर एक अध्ययन किया गया] जिसमें पता चला कि झारखंड में भूमि की उत्पादकता तेजी से घट रही है.  2003 से 2005  में 9 करोड़ 45 लाख हेक्टेयर जमीन ऐसी थी जिसे क्षरित भूमि बताया गया था. वहीं साल 2018-19 में 9  करोड़ 78 लाख हेक्टेयर जमीन इस श्रेणी में आ चुकी थी.

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कारण को लेकर क्या कहती है रिपोर्ट

उर्वरता की कमी के कारण कई हैं। रिपोर्ट के अनुसार आजकल लोग खेती में रसायन का सबसे ज्यादा प्रयोग करते हैं. जिससे वनस्पति का क्षरण होता है. इसलिए जमीन की उर्वरता कम होने में 31 फीसदी रसायन कारक भी जिम्मेदार हैं.  वहीं जंगलों की कटाई भी जोरों पर है. जिससे पानी तेजी से नीचे उतरता है. पानी के तेज बहाव के कारण मिट्टी की उपजाऊ परत बह जाती है. भूमि क्षरण के लिए 37 प्रतिशत जंगल की कटाई भी जिम्मेदार है.

दूसरे राज्यों के आंकड़े क्या कहते हैं

सिर्फ झारखंड ही भूमि क्षरण का शिकार नहीं हो रहा है, बल्कि दूसरे राज्य भी अलग-अलग कारणों से इसकी चपेट में हैं. अगर झारखंड में 68.77% भूमि की उर्वरता नष्ट हो रही है, तो राजस्थान में 62.06% और दिल्ली में ये आंकड़ा 61.73% पर पहुंचता है. इसके अलावा गोवा में 52.64%, गुजरात में 52.22%, नागालैंड में 50%, महाराष्ट्र में 46.49%, हिमाचल प्रदेश में 43.11%, त्रिपुरा 42.66%, लद्दाख 42.31%, कर्नाटक 36.29%, ओडिशा में 34.42% और तेलांगना 31.68% भूमि इससे प्रभावित हुई है.

 

 

 

Tags:News

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