रांची(RANCHI): झारखंड में प्री मानसून बारिश नहीं होने से फसल अच्छी रही. यहां सब्जियों का उत्पादन काफी ज्यादा हो रहा है इटकी, पिठोरिया, ब्राम्बे जैसे उत्पादक क्षेत्रों में थोक में सब्जी 3 से 5 रूपए किलो बिक रही है. भिंडी, करेला, झींगा, नेनुआ सभी सब्जियां थोक में कम दामों पर बिक रही हैं. वहीं पिछले साल जून महीने में सब्जियों के दाम में आग लगा हुआ था. यही सारी सब्जियां उस वक्त थोक में 20 से 25 रुपए किलो में किसान बेच रहे थे. लेकिन इस बार किसानों के चहरे पर मायूसी नजर आ रही है. सब्जी की कीमत नहीं बढ़ने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है.
1 किलो भिंडी उपजाने में 4 रुपया खर्च
किसानों का कहना है कि खेत में सब्जियां भरी पड़ी हैं लेकिन आमदनी इतनी नहीं है कि वे उसे तुड़वा भी सकें. क्योंकि सब्जी तुड़वाने में भी मजदूरी लगती है. किसानों का कहना है कि 1 किलो भिंडी उपजाने में 4 रुपया खर्च होता है, लेकिन अभी वे इस भिंडी को 3 रुपया में बेच रहे हैं. जिससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है. वहीं अगर खाद की बात करें तो वो भी पिछले साल से 20 प्रतिशत ज्यादा महंगा है. किसानों का कहना है कि जून के महीने में अभी तक सब्जियों के दाम इतने कम नहीं हुए थे.
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सब्जियों के दाम में कमी के ये हैं कारण
-प्री मानसून बारिश का नहीं होना
-आसपास के राज्यों में भी सब्जियों का अच्छा उत्पादन होना
-कोरोना काल के बाद युवाओं का खेती में रुचि बढ़ना, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग खेती कर रहे हैं
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बारिश होने पर सब्जी के भाव बढ़ने की संभावना
किसानों का कहना है कि इस बार मौसम काफी अनुकूल है जिससे सब्जी की उपज ज्यादा हुई है. लेकिन बारिश होने के बाद सब्जी के दाम बढ़ सकते हैं. चूंकि बारिश के बाद खेतों में जब पानी ज्यादा जमा हो जाएगा तो इससे फसल नष्ट होने की संभावना होगी.
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व्यापारी कमा रहे मुनाफा
एक तरफ जहां किसान सब्जी की काम कीमत होने से मायूस हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापारी काफी खुश हैं. व्यापारी किसानों से कम कीमत पर सब्जी खरीद मार्केट और दूसरे राज्यों में ज्यादा कीमत पर बेच मुनाफा कमा रहे हैं. कम कीमत के बावजूद व्यापारी 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफा कमा रहे हैं.
