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पंचायत पर्यवेक्षक ने उड़ा लिये सांसद निधि योजना के लाखों रुपए, दो मामले में मिली तीन-तीन साल की कैद

पंचायत पर्यवेक्षक ने उड़ा लिये सांसद निधि योजना के लाखों रुपए, दो मामले में मिली तीन-तीन साल की कैद

दुमका(DUMKA): झारखंड में दुमका की एक अदालत ने सांसद निधि योजना के तहत स्वीकृत सरकारी योजना की राशि गबन करने से संबंधित दो मामले में एक ही आरोपी को तीन-तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. सजा पूर्व पंचायत पर्यवेक्षक वीरेंद्र राम को मिली है। इनको एक मामले में 42 हजार रुपए और दूसरे मामले में लगभग 99 हजार रुपए सरकारी राशि का गबन करने का दोषी पाया गया है. दुमका के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी विजय कुमार यादव की अदालत ने सजा सुनाई है. सरकार की ओर से सहायक लोक अभियोजक रामकिंकर पांडेय ने बहस में हिस्सा लिया.

कोर्ट में पेश किये गए कई गवाह और कागजी साक्ष्य

अभियोजन पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान न्यायालय में 7 गवाह और 13 कागजी साक्ष्य पेश किये गये. वहीं न्यायालय ने लगभग 99 हजार रुपए की सरकारी राशि गबन करने के मामले में आरोपी पंचायत पर्यवेक्षक वीरेंद्र राम को दोषी पाकर तीन साल सश्रम कारावास और दो लाख रुपए क्षतिपूर्ति अदा करने की सजा सुनायी. पहले मामले में भी इनको तीन साल के सश्रम कारावास के साथ एक लाख रुपए जुर्माना अदा करना है. जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर तीन महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी. इस मामले में सरकार की ओर से न्यायालय में छह गवाह के साथ साक्ष्य के तौर पर 16 कागजी दस्तावेज पेश किये गये.

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ये है मामला?

सहायक लोक अभियोजक रामकिंकर पांडेय से मिली जानकारी के मुताबिक जामा के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी निरज कुमार सिंह के लिखित शिकायत पर दो अलग-अलग योजनाओं की राशि गबन करने को लेकर पूर्व पंचायत पर्यवेक्षक वीरेंद्र राम के खिलाफ जामा थाना में कांड संख्या 114/2005 और 115/2005 दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. जामा थाना कांड संख्या 114/2005 में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार सांसद निधि से जामा प्रखंड क्षेत्र के गादीदेवली वाद उन्नयन योजना 2001-02 योजना स्वीकृत की गयी थी जिसकी प्राक्कलित राशि 6 लाख 11लाख रुपए थी. नामजद आरोपी द्वारा उक्त योजना के तहत स्वीकृत राशि के विरुद्ध अग्रिम राशि के रुप 5.32 लाख रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया गया, लेकिन महज 4 लाख. 90 हजार रुपए का कार्य दिखा कर 42 हजार रुपए सरकारी राशि का गबन कर लिया गया.

वहीं जामा थाना कांड संख्या 115/2005 में भादवि की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक 2001-2002 में सांसद निधि से जामा प्रखंड क्षेत्र के बेलकूपी से तपसी आदिवासी टोला तक सड़क और पुलिया निर्माण के लिए प्राक्कलित राशि 4 लाख 53 हजार रुपए की योजना स्वीकृत की गयी थी. इस स्वीकृत योजना के तहत आरोपी पंचायत पर्यवेक्षक वीरेंद्र राम ने अग्रिम राशि के रुप में 3 लाख 65 हजार रुपया भुगतान प्राप्त कर लिया, लेकिन महज 2 लाख 65 हजार रुपए का काम दिखाकर लगभग 99 हजार रुपए सरकारी राशि का गबन कर लिया.

रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका  

Published at:06 Jun 2022 05:45 PM (IST)
Tags:News
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