✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

'कौड़ी टू क्रेडिट कार्ड' : मुगलकाल से वर्तमान तक मुद्रा का अनोखा संग्रहालय

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 9:39:19 PM

धनबाद(DHANBAD): धनबाद में मुद्रा की कहानी और उदाहरण रखे हुए हैं. आप भी देख सकते हैं. इसे सहजने वाले हैं अमरेंद्र आनंद, एलआईसी रिटायर्ड ऑफिसर हैं और धनबाद के कुसुम विहार में रहते है. उनके पास मुगल काल से लेकर अंग्रेजों के जमाने तक का, देश की आजादी के बाद या उससे बहुत पहले के मुद्रा के इतिहास और उनकी बनावट मौजूद है. घर को उन्होंने म्यूजियम बना रखा है और अपने इस अभियान का नाम दिया है 'कौड़ी टू क्रेडिट कार्ड' सिर्फ देश में ही नहीं ऑस्ट्रेलिया में भी वे अपने द्वारा संग्रहित सिक्कों की प्रदर्शनी लगा चुके हैं. 

मुद्रा का प्रचलन कौड़ी से शुरू होकर क्रेडिट कार्ड तक पहुंच गया

उनका कहना है कि इस काम का उन्हें शौक नहीं बल्कि जुनून है और जिस आदमी को जिस चीज का जुनून सवार हो जाता है,  वह करके ही दम लेता है. उनका कहना है कि देश में मुद्रा का प्रचलन समुद्र में मिलने वाली कौड़ी से शुरू हुआ. कौड़ी के भी कई प्रकार थे. उसके बाद धीरे-धीरे सब कुछ बदलता गया और बदलते-बदलते आज समय क्रेडिट कार्ड का आ गया है. अमरेंद्र आनंद की मानें तो मुगल काल के समय के कॉइन में उनकी विशेषज्ञता है. एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण उन्होंने बतायी कि अंग्रेजों के जमाने में धनबाद के गोविंदपुर में भी कॉइंस बनाने का कारखाना था, जिसे तकनीकी शब्दों में मिंट कहा जाता है. यहां पर तांबे के कॉइन्स अकबर के जमाने में बनाए जाते थे. 

सभी मुदाओं का विवरण है मौजूद

उनके कलेक्शन को देखकर ऐसा लगता है कि काफी बारीकी और समझदारी से कलेक्शन किया और रखा गया है.  मुद्रा कैसे-कैसे आगे बढ़ा, चाहे वह काल मुगलों का हो, अंग्रेजों का हो या फिर आजाद भारत का हो. सबका विवरण और उदाहरण मौजूद है. आज जिस तरह हम लोग पर्स में रुपए रखते हैं, उसी तरह पहले, बहुत पहले लोग गले में कौड़ी की माला पहनते थे और अपनी जरूरत के सामानों की खरीदारी करते थे. होता यह था कि माला पहन कर लोग जाते थे और कीमत के रूप में गले से कौड़ी निकाल कर दे देते थे और बाकी बचे कौड़ी को गले में फिर पहन कर चले आते थे. अमरेंद्र आनंद मूलतः बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले हैं. 

रिपोर्ट:  शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश

Tags:News

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.