धनबाद(DHANBAD) - धनबाद का सबसे पुराना बाजार यानी पुरानी बाजार, इस बाजार की खासियत है कि सूई से लेकर कपड़ा, सब्जी से लेकर घड़ियां, छोटे दुकानों से लेकर होल सेल सब कुछ इस बाजार में है लेकिन आज इस बाजार की हालत देखकर ऐसा नहीं लगता है कि इस पर किसी का ध्यान है. एक विशेषता और है कि अंग्रेजों के समय का यहां 'सिंह दरवाजा' बाजार भी है.
बाजार की विशेषता
इस बाजार की एक अलग ही विशेषता है लेकिन फिलहाल यह बाजार अतिक्रमण की चपेट में कराह रहा है. धनबाद जिले में सस्ता सामान के लिए विख्यात यह पुरानी बाजार में अब वाहनों की बात कौन कहे, पैदल चलने लायक भी नहीं रह गया है. एक समय की 35 फीट की सड़क आज 5 से 8 फीट तक सिमट कर रह गई है. इस पूरे बाजार में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है. सड़क के दोनों किनारे के दुकानदार भी इसके लिए कम जवाब देह नहीं है. जैसा कि बताया जाता है अपनी दुकानों के आगे ₹300 प्रतिदिन के हिसाब से ठेला और खोमचा लगाने की अनुमति दे देते हैं. नतीजा होता है कि सड़कें और सकरी हो जाती है. पुराना बाजार चेंबर ऑफ कॉमर्स लगातार इसका विरोध कर रहा है.
बिक्री पर असर
कभी-कभी तो सदस्य खुद आकर जाम हटाते हैं. लेकिन घंटे भर बाद फिर वहीं स्थिति बन जाती है और लोगों को पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. दुकानदारों की मानें तो अतिक्रमण के कारण उनकी बिक्री 50% से भी कम हो गई है. जाम के कारण कोई ग्राहक आना पसंद नहीं करता. जाम हटवाने के लिए या सड़क को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के पास गुहार का भी कोई असर नहीं हुआ है और दुकानदार के साथ ग्राहक भी खामियाजा भुगत रहे हैं. यह स्थिति कब तक बनी रहेगी, यह देखने वाली बात होगी.
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश
