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डायन बिसाही से रोकने के लिए सरकार हर पंचायत में रखेगी वॉलएंटीयर, जानिए और क्या हैं योजनाएं

डायन बिसाही से रोकने के लिए सरकार हर पंचायत में  रखेगी  वॉलएंटीयर, जानिए और क्या हैं योजनाएं

 रांची (RANCHI) : झारखंड में डायन- बिसाही की समस्या गंभीर है.  NCRB 2020  की रिपोर्ट के मुताबिक डायन बिसाही मामले में झारखण्ड तीसरे नंबर पर जबकि मध्यप्रदेश एक नंबर पर है. दरअसल झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है. आदिवासी इलाकों में डायन की समस्या 
अधिक होती है. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में खासतौर पर डायन घोषित कर जान मारने  की समस्या देखने को मिलती है. डायन या बिसाही बताकर किसी को मारने  के पीछे मुख्य तौर पर कई वजहें होती हैं. ईर्ष्या की भावना, कोई निजी स्वार्थ, जमीन हड़पने की साजिश या पुत्र  नहीं होने पर, साजिश या तांत्रिक ओझा के साथ अंधविश्वास का चक्कर होता है.

2000 रुपए प्रतिमाह पर वॉलएंटीयर

"THE NEWS POST"ने महिला समाज कल्याण विभाग से डायन बिसाही के प्रचार-प्रसार करने के लिए योजनाओं की जानकारी हासिल की तो पता चला कि विभाग की ओर से झारखंड के रीमोट एरिया में एक महिला वॉलएंटीयर रखने की योजना बनाई गई है. इस वॉलएंटीयर को  2000 रुपए प्रति महीने देने की योजना है. फिलहाल विभाग ने कागजी तौर पर रूपरेखा तैयार की है. विभाग के द्वारा जमीनी तौर पर अभी इस योजना को उतारा नहीं गया है. 

माइक और ऑडियो-वीडियो विजुअल से प्रचार-प्रसार

राज्य सरकार की ओर से ऐसी घटनाओं पर अंकुश के लिए लगातार जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 लागू होने के बाद राज्यभर में डायन कुप्रथा के खिलाफ प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. सभी जिलों के साप्ताहिक हाट-बाजार में भी माइक और ऑडियो-वीडियो विजुअल के जरिए प्रचार-प्रसार किया जाता है. 

जमीन हड़पने की नीयत दोषी

डायन-बिसाही से जुड़े मामलों में ज्यादातर मामले निजी स्वार्थ के होते हैं. इनमें पारिवारिक विवाद और जमीन हड़पने की नीयत प्रमुख है. नि:संतान या विधवा महिला पर, सुंदर महिलाओं पर ऐसे अत्याचार अधिक होते. डायन-बिसाही मामले में हत्या की एक और वजह सामने आई है. जिसमें गांव में किसी के बीमार होने पर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने की जगह लोग तांत्रिक और ओझा-गुणी के पास पहुंच जाते हैं और उसके इशारे पर भी हत्या की घटना को अंजाम दिया जाता है.

2021-2022 में  जागरूकता कार्यक्रम में खर्च किए गए 1 करोड़ 20 लाख रुपए 

मुहल्लों, गांवों, पंचायतों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में भी इस इस बाबत जानकारी दी जा रही है. पोस्टर, पेंटिंग और बच्चों से राइटिंग कराया जाता है. चौराहे, प्रमुख स्थल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर होर्डिंग लगाया गए हैं. सभी जिलों में जागरूकता रथ भी चलाया जा रहा है. इसके लिए वित्तीय वर्ष 2020-2121 में 62 लाख 71 हजार रुपए खर्च किए गए. वित्तीय वर्ष 2021-22 में डायन कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम में 1 करोड़ 20 लाख रुपए खर्च किए गए.

Published at:18 May 2022 03:14 PM (IST)
Tags:News
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