धनबाद(DHANBAD) - कंपटीशन कंपनी ऑफ इंडिया (सीसीआई) की टीम धनबाद से चली गई है, लेकिन टीम की धमक की गूंज अभी भी सुनाई दे रही है. सूत्रों के अनुसार बीसीसीएल में काम कर रही पांच आउटसोर्सिंग कंपनियों के ऑनर सहित सीनियर अधिकारियों का मोबाइल कॉल डिटेल्स एजेंसी निकाल रही है. सूत्र बताते हैं कि इसमें फॉरेंसिक एक्सपर्ट की भी मदद ली जा रही है. बड़े टेंडर को मैनेज करने के नाम पर हुए खेल की तह तक जाने की कोशिश में कुछ दूसरी केंद्रीय एजेंसियों से भी सहयोग मांगा गया है.
पांच आउटसोर्सिंग कंपनियों के 9 ठिकानों पर हुआ था सर्च
शुक्रवार और शनिवार को टीम ने पांच आउटसोर्सिंग कंपनियों के 9 ठिकानों पर सर्च अभियान चलाया था. कंपनियों पर आरोप है कि आपस में सांठगांठ कर टेंडर मैनेज कर रही है. जिन पांच आउटसोर्सिंग कंपनियों की जांच पड़ताल की गई ,उन में धनसार इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड ,हिल टॉप, देवप्रभा , जीटी एस एवं संजय उद्योग के ठिकाने शामिल है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी ,हो सकता है कि इसमें कोयला अधिकारियों की गर्दन भी फंसे ,आपको बता दें कि बीसीसीएल में 2017 से अभी तक छोटे-बड़े कुल 146 व्यवसायिक फॉमो को काली सूची में डाला गया है लेकिन इन कंपनियों के मालिक , निदेशक दूसरे के नाम से नया फॉर्म बनाकर काम ले लेते हैं और फिर उनका धंधा जारी रहता है.
कंपनी का नाम बदल जाता है ,मालिक बदल जाते है लेकिन ...
सूत्रों के अनुसार टेंडर रिंगिंग या अन्य गड़बड़ियों में कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया जाता है. लेकिन वही लोग नई कंपनी बनाकर फिर मैदान में आ जाते हैं और कंपनी कुछ नहीं कर पाती है. बता दें कि अभी कोयला क्षेत्र में आउटसोर्सिंग कंपनियों का दबदबा बढ़ रहा है. कोयले की उत्पादन लागत कम करने के लिए कोयला कंपनियां आउटसोर्सिंग कंपनियों की ओर बढ़ रही है. बीसीसीएल में तो 70% से अधिक उत्पादन आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए हो रहा है. विभागीय उत्पादन में कॉस्ट आफ प्रोडक्शन बढ़ने के कारण कोयला कंपनिया प्रतियोगिता में पिछड़े नहीं, इसलिए आउटसोर्सिंग का सहारा लिया जा रहा है.
आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए हिंड्रेंस एक बढ़ा हथकंडा
सूत्र बताते हैं कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए हिंड्रेंस (पेनल्टी से बचने का तरीका ) एक ऐसा हथियार है जिसका उपयोग खूब किया जाता है. कभी मजदूर आंदोलन तो कभी बारिश तो कभी कुछ अन्य कारणों से कार्य बाधित होने का बहाना बनाकर हिंड्रेंस ले लिया जाता है. इससे आउटसोर्सिंग कंपनियों को तो फायदा होता है लेकिन कोयला कंपनियों को नुकसान झेलना पड़ता है. सूत्र बताते हैं कि बगैर क्षेत्रीय महाप्रबंधक के अप्रूवल से ही हिंड्रेंस मिलता है.
