धनबाद(DHANBAD) | राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन (इंटक) के उपाध्यक्ष तथा राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के महामंत्री ए के झा ने आज यहां बताया कि भारत सरकार के कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया पर दबाव डालकर बंद पड़ी एक सौ कोयला खदानों में 20 कोयला खदान को बड़े पूंजीपतियों को सौंपने की घोषणा की है, जिसका टेंडर शीघ्र निकाला जा रहा है. कोल इंडिया लिमिटेड के लगभग ढाई लाख कर्मचारी ,जो स्थाई मजदूर के दर्जे पर हैं तथा ढाई लाख ठेकेदार मजदूर के वेज रिवीजन का मामला काफी दिनों से लटका हुआ है.
सरकार ने एक सोची-समझी नीति के तहत कोल इंडिया लिमिटेड को बड़े पूजीपतियों को सुपुर्द करने का मन बना लिया है. भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, जहां मात्र 34000 मजदूर बचे हैं ,उनमें भी 10000 मजदूरों को सर प्लस घोषित करना और उसे दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर करने का बात करना यह दुखद ही नहीं काफी निराशाजनक है. सरकार की मंशा और नियत भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के अस्तित्व को मिटाने का है.
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड कंपनी ने देश को हर विषम परिस्थिति में मजबूती के साथ सहयोग किया, समर्थन किया,हर संकट की घड़ी में देश का साथ दिया और यहां तक कि कोविड-19 में कोल इंडिया लिमिटेड के मजदूरों ने विशेषकर बीसीसीएल के मजदूरों ने अपनी जान को जोखिम में लेकर कोयला उत्पादन को मजबूती से किया. कोयला मंत्री से अपील है कि वह श्रमिक संगठनों के साथ गोलमेज कांफ्रेंस करे. कोल इंडिया लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों को साथ में रखें और देश हित में मजदूर हित में लोकहित में आपसी विचार विमर्श के द्वारा शीघ्र निर्णय ले ,ताकि मजदूरों को हड़ताल करने के लिए विवश ना होना पड़े.
