चाईबासा (CHAIBASA): जिले के विभिन्न क्षेत्र में दो दिवसीय दौरे पर निकली खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच के साथ अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ और रीतिका खेड़ा ने पश्चिमी सिंहभूम में पाई शिक्षा की दयनीय स्थिति और जन वितरण प्रणाली में घोर अनियमितताऐं को अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज और रीतिका खेड़ा खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम के कार्यकर्ताओं के साथ जिले के कई गावों का दौरा किया. इस दौरान विद्यालयों में शिक्षा की दयनीय स्थिति और जन वितरण प्रणाली में घोर अनियमितता पाई गई. दल ने उपायुक्त से 25 अप्रैल को मुलाकात कर स्थिति से अवगत किया और कार्रवाई की मांग की और उपायुक्त को आज संलग्न पत्र भेजा गया.
बच्चों की दयनीय शैक्षणिक क्षमता
दल ने दो दिनों में सदर व टोंटो प्रखंडों के कई सरकारी विद्यालयों का भी भ्रमण किया. यह पाया गया कि क्लास 5 के बच्चे सरल शब्द पढ़ने में भी असक्षम हैं. इन बच्चों के ड्राप-आउट होने की काफी संभावना है. लेकिन इस स्थिति को सुधारने के लिए किसी भी विद्यालय में प्रशासन की ओर से कुछ विशेष पहल नहीं दिखी. दल का मानना है कि ऐसी परिस्थिति में तुरंत विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की ज़रूरत है एवं कम-से-कम अगले एक साल तक बच्चों के लिए विद्यालय के बाद अतिरिक्त क्लास की व्यवस्था होनी चाहिए. जिले में एक विशेष साक्षरता अभियान चलाने की ज़रूरत है जिससे प्रशासन की हर कड़ी व जनता में इस मुद्दे पर सजगता आए और सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो. साथ ही खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच ने कई बार इसकी मांग की है.
दल ने ज़िले के विभिन्न प्रखंडों के ग्रामीण विद्यालयों में मध्याह्न भोजन में सेंट्रलाइज्ड किचन व्यवस्था शुरू करने के निर्णय से होने वाले खतरों और घाटे के विषय में भी उपायुक्त को अवगत कराया. ग्रामीण क्षेत्रों में सेंट्रलाइज्ड किचन से दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता सुनिश्चित करना मुश्किल होगा.
निम्न संभावनाओं से नकारा नहीं जा सकता है:
- वर्तमान मध्याह्न भोजन व्यवस्था में अनियमितता बढ़ेगी
- भोजन खाराब हो सकता है (खास कर के गर्मी के मौसम में)
- बच्चों, अभिभावकों व शिक्षकों का मध्याह्न भोजन की नियमितता व गुणवत्ता पर नियंत्रण नहीं रहेगा
- सैंकड़ों रसोइयाँ बेरोज़गार हो जाएँगी
दल ने उपायुक्त से मांग की कि ग्रामीण विद्यालयों में मध्याह्न भोजन में सेंट्रलाइज्ड किचन व्यवस्था शुरू करने के निर्णय पर पुनः विचार की ज़रूरत है.
जन वितरण प्रणाली में अनियमतताऐं
टोंटो प्रखंड के कैनुआ और सनकुचिया में पाया गया कि राशन डीलर कार्डधारियों को 10 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह अनाज के बजाय 5 किलो से भी कम दे रहा है, जबकि ऑनलाइन व्यवस्था में पूरी मात्रा दर्ज कर रहा है. ग्रामीणों ने राशन न मिलने व इस गड़बड़ी की शिकायत कई बार ज़िला प्रशासन को भी की थी, लेकिन कार्यवाई नहीं हुई.
सनकुचिया में 94 राशनकार्डों में मार्च महीने की दर्ज मात्रा और ऑनलाइन वितरण सूचि (पोस मशीन के आधार पर दर्ज) के अंकेक्षण से पाया गया कि डीलर ने केवल ऑनलाइन वितरण में सर्ज सूचि का केवल एक-तिहाई राशन ही कार्डधारियों को दिया था. यह तो अनाज गबन का स्पष्ट उदहारण है. दल ने मांग की कि सनकुचिया के राशन डीलर के विरुद्ध तुरंत कार्यवाई की जाए (लाइसेंस रद्द करना, गबन किए अनाज की वसूली आदि) ऐसी स्थिति सिर्फ दो गावों तक ही सीमित नहीं है. खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच के कार्यकर्ता ज़िले के अनेक गावों में ऐसी ही स्थिति पा रहे हैं.
दल ने उपायुक्त से निम्न माँगे की:
- भ्रष्ट डीलरों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाई व कार्यवाई का पर्याप्त प्रचार-प्रसार
- उपायुक्त समेत अन्य ज़िला स्तरीय पदाधिकारियों (जो राशन वितरण व्यवस्था से नहीं जुड़े हैं) द्वारा नियमित रूप से राशन दुकानों का औचक निरिक्षण
- लोगों के मूल राशन सम्बंधित अधिकार व PMGKAY अंतर्गत 5 किलो अनाज प्रति व्यक्ति प्रति माह की जानकारी का व्यापक प्रचार प्रसार
रिपोर्ट: अविनाश कुमार, चाईबासा