धनबाद (DHANBAD) : धनबाद की सड़क पर एक एंबुलेंस गुजर रहा था. एंबुलेंस में एक मरीज तड़प रहा था. हॉस्पिटल पहुंचने पर शायद उसे राहत मिलती, पर सड़क जाम के कारण एंबुलेंस आगे बढ़ नहीं पाया और रास्ते में ही मरीज की मौत हो गई. इस घटना ने कई संवेदनशील लोगों को झकझोर दिया. व्यवस्था को कोस कर भड़ास निकाली गई. पर शहर की पूजा रत्नाकर इतने से ही नहीं थमी. 'मैं हूं धनबाद' संस्था उनकी इसी संवेदनशीलता का नतीजा है. इस सामाजिक संस्था का नाम धीरे- धीरे लोगों की जुबान पर चढ़ रहा है और धनबाद की जनता अपनी समस्याओं से संस्था को अवगत भी करा रही है. संस्था के लोगों का दावा है कि वे जी -जान से समस्याओं के समाधान में लगे हुए हैं. यह बात अलग है कि अभी समाधान की दिशा में इस संस्था को बहुत सफलता नहीं मिली रही है. लेकिन आगे मिलेगी, इस विश्वास के साथ यह संस्था आगे बढ़ रही है.
कसी कमर, दूर करेंगे समस्याएं
पूजा रत्नाकर का कहना है कि अगर ईमानदारी पूर्वक किसी भी समस्या के समाधान के प्रति लग जाया जाए तो समाधान होगा जरूर, परेशानी हो सकती है, देरी हो सकती है, तरह-तरह की बातें सुननी पड़ सकती है लेकिन काम होकर ही रहेगा. उन्होंने जनप्रतिनिधियों का आह्वान किया कि अगर वास्तव में किसी भी समस्या का समाधान करना चाहते हैं, धनबाद की जनता उनके साथ खड़ी होने के लिए तैयार है. लेकिन इस काम में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने प्रश्न किया कि धनबाद को मिला ही क्या है- शिक्षा, स्वास्थ्य ,सड़क, बिजली ,पानी सबकी हालत तो खराब है. गया पुल अंडरपास की बात कर ली जाए तो 'थाली में खाना देकर धनबाद से छीन लिया गया. 'आखिर क्या वजह है कि रेलवे की जिस संस्था में इस अंडरपास के लिए डीपीआर बनाई , वही रेलवे डीपीआर पर प्रश्न खड़ा कर रही है. संस्था ने दावा किया कि 'दाल में काला' जरूर है और 'मैं हूं धनबाद' संस्था दाल में क्या काला है ,इसको ढूढ़कर निकालेगी, लोगों के सामने रखेगी और अंडरपास का काम पूरा करा कर ही रहेगी.
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह ,धनबाद
