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कोयलांचल में कोयला छुए नहीं कि बरसने लगती है लक्ष्मी की कृपा, जानिए कैसे....

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 2:09:22 AM

धनबाद (DHANBAD) : जिला और पुलिस प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमारी के बावजूद धनबाद जिले में कोयले के अवैध उत्खनन का  सूचकांक अभी  टॉप पर है.  कोयला चोर, तस्करों और 'रिमोट' से गैंग चलाने वाले लोगों में किसी का भी तनिक भय नहीं है.  इस काले धंधे में लगे लोग सिर्फ अवैध उत्खनन की ही फुलप्रूफ व्यवस्था नहीं की है, बल्कि  कोयले की मार्केटिंग का भी उनके पास ठोस इंतजाम है. केवल लोकल स्तर पर ही कोयले की खपत नहीं होती, बल्कि फर्जी जीएसटी बनाने वाले गिरोह भी सक्रिय हैं और 300 से 400 रुपए प्रति टन के हिसाब से पेपर तैयार करते हैं. बता दें कि कोयला चोरी, इलीगल माइनिंग के सारे  रिकॉर्ड पीछे छूट गए हैं.  

इलाका बांटकर बेधड़क हो रहा अवैध उत्खनन 

इलाका बांटकर अवैध उत्खनन बेधड़क किया जा रहा है. हालांकि  इसमें टकराहट होने की भी सूचना मिलती रहती है. छोटे- बड़े सारे लोग बहती गंगा में हाथ धोने को 'चींटी -माटा' के तरह 'बिलों' से निकल पड़े हैं. ठिठाई तो इतनी है कि अब साइकिल से कम, बाइक, स्कूटर, ट्रैक्टर, छोटा हाथी, बड़ा हाथी से दिन के उजाले में, थाना -पुलिस के सामने से कोयले की ढुलाई बेधड़क होती है. सुबह में तो शहर में किसी सड़क पर कोयला लोड बाइक का रेला चलता है तो कहीं साइकिल वाले भी कदमताल करते दिख जाते हैं. अब आप यह पूछ सकते हैं कि आखिर यह कोयला जाता कहां है तो जानकारी के अनुसार अवैध कोयले की खपत न केवल स्थानीय चिन्हित हार्ड कोक उद्योग  में हो रही है, बल्कि यह कोयला बिहार, यूपी व बंगाल की मंडियों में भी जा रहा है. 
 
हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग 'बादशाह' नियुक्त
 
हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग 'बादशाह' नियुक्त हैं. उन 'बादशह'   को कोयले के अवैध खनन का मौखिक पट्टा लेने वालो को  अग्रिम भुगतान कर देना होता है, जितने दिन का करार होता है, उसके बाद फिर इस करार को 'फूल- बेलपत्र' के साथ आगे बढ़ाना पड़ता है.  इस धंधे में सबकी अपनी -अपनी हिस्सेदारी है .  जानकार बताते हैं कि कोयले के अवैध उत्खनन और धंधे का 'मॉडस ऑपरेंडी'  इतना अधिक बदल गया है कि पुराने सभी 'घाघ'  लोग  किनारा कर लिए हैं.  बहुतों की राशि तो डूब गई, वजह काम चालू करते ही उनकी साइट में दुर्घटना हो गई और काम बंद हो गया.  कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कोयलांचल में नए गैंग ने  तूफान मचा रखा है जबकि पुराने 'घाघ'  किनारे बैठ कर टुकुर -टुकुर अपने समय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. 

किस- किस ढंग से होता कोयले का उत्खनन
 
 कोयला उत्खनन करने में लगे गिरोह के लोग 3 तरह से कोयला काटते हैं.  एक तो बाहर के मजदूरों को लगाकर कोयला काटा जाता है. इन्हें प्रतिदिन की मजदूरी के हिसाब से भुगतान मिलता है.  दूसरा तरीका यह है कि स्वयं पेट की आग शांत करने के लिए लोग कोयला काटते हैं और कोयला काटकर खदान से बाहर लेकर आने पर उन्हें किलो के हिसाब से भुगतान मिल जाता है.  तीसरा तरीका जो बहुत तेजी से बढ़ा  है, वह है कि जेसीबी मशीन लगाकर बेधड़क डंके की चोट पर कोयला काटा जाता है. सबूत  के तौर पर कहा जा सकता है कि अभी एक सप्ताह पहले ही कतरास इलाके में कोयला काटने  के विवाद में एक जेसीबी मशीन को फूंक दिया गया था. 

Tags:News

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