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भू-धंसान के बाद डर से बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे अभिभावक, झालसा के अधिकारियों ने किया स्थल निरीक्षण

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 6:31:23 PM

धनबाद(DHANBAD) - धनबाद के चिरकुंडा का धंसान स्थल का झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) रांची के उप सचिव कुमार अभिषेक निरीक्षण करने पहुंचे. साथ में ग्रामीण एसपी भी है.  उप सचिव ने पूरे इलाके का भ्रमण किया और लोगों से जानकारी एकत्रित की. इस दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ किअवैध उत्खनन के कारण नया प्राथमिक विद्यालय, डुमरीजोड़ में बच्चे पढ़ाई करने नहीं आ रहे है. सड़क धंस गई है, इस कारण से अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे है.

घटनास्थल का निरीक्षण

जानकारी के अनुसार निरीक्षण के बाद उप सचिव ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और बीसीसीएल के अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की कि धंसान होने से पूर्व इसकी रोकथाम के लिए क्या उपाय किए गए थे और धंसान फिर नहीं हो, इसके लिए क्या उपाय किए जा रहे है.  बता दें कि चिरकुंडा थाना और पंचायत ओपी की सीमा पर स्थित डुमरीजोड़ में गुरुवार की सुबह करीब 8:00 बजे अवैध खनन के लिए किए गए विस्फोट से ग्रामीण सड़क धंस गई. दो दिनों तक यहां अधिकारी मामले की जांच को आते रहे, घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं है.  धनबाद के उपायुक्त ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश रांची से भागे-भागे धनबाद पहुंचे. उन्होंने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया. उनके साथ धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह भी  थे. 

 

तेजी से बढ़ रहा अवैध उत्खनन

गौरतलब है कि धनबाद में अवैध खनन ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता ही गया की तर्ज पर चाहे जितनी भी छापेमारी हो. अवैध उत्खनन उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है. छापामारी होने के दो 4 घंटे भी अवैध उत्खनन का काम नहीं रुकता, इधर अधिकारी जाते नहीं, उधर अवैध खनन का काम शुरू हो जाता है. यह अवैध उत्खनन जेसीबी मशीन लगाकर डंके की चोट पर किया जाता है. कोयलांचल के विभिन्न क्षेत्रों में धसान और दबकर मरने की सूचनाएं मिलती रहती है. बता दें कि अवैध उत्खनन कारोबार में ऐसे -ऐसे सफेदपोश लगे हुए हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि कल तक जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. अब वह चमचमाती कीमती गाड़ियों पर चलते है. 

बंगाल के मजदूर

कोयलांचल में अवैध खनन कराने के लिए बंगाल से मजदूर मंगाए जाते हैं. इसके पीछे कारण यह बताया जाता है कि अवैध उत्खनन हो जाने के बाद अगर लोग दब गए तो कोई दावेदार सामने नहीं आता और अवैध उत्खनन में लगे धनपशुओं को मामले को दबाने में सहूलियत होती है. सबसे दुखद बात यह है कि दिनभर कोयला काटने के बाद भी मजदूरों को वही 3:00 ₹400 मिलते हैं और अगर घटना घट गई, चाल धस गई, मजदूर दब गए तो उनकी लाशों का सद्गति तक नहीं मिलती.

रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंब, धनबाद

Tags:News

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