सरायकेला (SARAIKELA) - झारखण्ड के ग्रामीण क्षेत्र में 21 वीं सदी में भी तंत्र-मंत्र की शक्ति का प्रभाव देखा जा रहा है. आज भी झारखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के लिए अवैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाता है. ऐसा ही एक मामला बीरवांस से आया जहां 15 साल के अजय सरदार को अपना हाथ गंवाना पड़ा. वह खेलते समय गिर गया और उसका बायां हाथ टूट गया. लेकिन सही इलाज के बजाय झोला छाप वैद्य के इलाज के कारण हाथ खोना पड़ा.
परिजन के चेहरों पर खुशी
आम लोगों ने डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया है. बीते दिनों आदित्यपुर स्थित मगध सम्राट अस्पताल में कोलाबीरा पंचायत के बीरबांस निवासी सीताराम सरदार अपने 15 वर्षीय पुत्र अजय सिंह सरदार के साथ अस्पताल पहुंचे. दरसल बच्चे का हाथ 20 दिन पहले खेलने के दौरान टूट गया था. जिसके इलाज के लिए मगध सम्राट अस्पताल पहुंचा गया. यहां मगध सम्राट अस्पताल के सर्जन सूरज कुमार के द्वारा सफल ऑपरेशन कर अजय की जान बचाई गई. बेटे को दर्द से मुक्त देख परिजन के चेहरों पर खुशी दिखी गई.
कैसा हुआ हादसा
दरअसल अपने साथियों के साथ खेलने के क्रम में अजय के गिरने से उसका बायां हाथ टूट गया. झोला छाप वैद्य ने इसका इलाज करते हुए बांस की करची से उसके हाथ को बांध दिया. इस कारण रक्त का संचार रूक गया. इससे उसका बायां हाथ काला पड़ने लगा. बेटे का दर्द देख परिजन उसे रांची और जमशेदपुर के दर्जनों अस्पताल और नर्सिंग हॉम ले कर घूमे. लेकिन सभी ने अजय का इलाज करने से इंकार कर दिया. वहीं मगध अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक नोनिहाल को एक नई जिन्दगी दी.
रिपोर्ट : रंजीत ओझा, सरायकेला
