धनबाद (DHANBAD) : जिले में 24 निजी क्लीनिक के संचालकाें ने आयुष्मान कार्ड धारियों का 16 अप्रैल से इलाज करना बंद कर दिया है. आयुष्मान कार्ड धारियों में से लगभग 400 ऐसे रोगी जिनका डायलिसिस होना अनिवार्य है, उन्हें सुविधा नहीं मिलने से शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में धनबाद सिविल सर्जन ने "द न्यूज़ पोस्ट" से बात करते हुए कहा कि मानवता के आधार पर चिकित्सकों को इलाज की सुविधा जारी रखनी चाहिए. उन्हें पैसा मिलने में लेट हो रहा है, लेकिन मिल जाएगा. राज्य सरकार से विभागीय बातचीत चल रही है. बहुत जल्द ही निजी संचालकों के अकाउंट में पैसा वापस हो जाएगा.
हॉस्पिटल संचालकों ने खड़े किए थे हाथ
आयुष्मान कार्ड भारत सरकार का महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक है. धनबाद जिले में आयुष्मान कार्ड धारियों को उचित इलाज नहीं मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं संचालकों का कहना है कि उन्हें समय पर पैसे नहीं मिलने से बैंक में इंटरेस्ट भरना पड़ रहा है. दो करोड़ रुपए का बकाया पाटलिपुत्र नर्सिंग होम का है. संचालक डॉक्टर निर्मल डरोलिया ने बताया कि उनका करीब दो करोड़ रुपए बकाया है. फिलहाल इन्हीं कारणों से आयुष्मान कार्ड धारियों का इलाज उचित संभव नहीं हो पा रहा है. सिविल सर्जन ने साफ तौर पर कहा है जो भी क्लीनिक संचालक अगर इलाज नहीं करते हैं तो क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत उन पर कार्रवाई की जाएगी.
