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संताल परगना की शान रहे मोबाइल लाइब्रेरी के आ गए अच्छे दिन, साहित्यिक कार्यक्रमों के साथ नए रूप में होगा दीदार

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 5:00:47 PM

दुमका(DUMKA) : पुस्तक से चेतना आती है और पुस्तकालय समाज की सामूहिक सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बिंदु माना जाता है. यही वजह है कि विदेशी आक्रमणकारी जब भारत पर आक्रमण करते थे तो उनके निशाने पर पुस्तकालय भी हुआ करता था. विक्रमशिला, तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास इसका उदाहरण है. लेकिन अफसोस है कि स्वतंत्र भारत में भी पुस्तकालय की स्थिति धीरे धीरे दयनीय होती गयी. हम बात कर रहे हैं दुमका के राजकीय पुस्तकालय की. संयुक्त बिहार में 1956 में दुमका में राजकीय पुस्तकालय की स्थापना हुई. पुस्तक गांव गांव पहुंचे इसके लिए तत्कालीन सरकार द्वारा भ्रमणशील पुस्तकालय की परिकल्पना को साकार करते हुए राजकीय पुस्तकालय को एक वाहन मुहैया कराया गया जो 1974 के बाद जीर्ण शीर्ण होकर गैराज की शोभा बढ़ाता रहा.  लेकिन वर्तमान उपयुक्त रविशंकर शुक्ला के प्रयास से एक तरफ जहां विरासत को संजोए रखने के लिए भ्रमणशील पुस्तकालय को नया रूप दिया जा रहा है. साथ ही साहित्यिक गतिविधियां भी शुरू करवायी जा रही हैं. दूर-दूर से साहित्यकारों को आमंत्रित किया जा रहा है.

16 एवं 17 अप्रैल  को राज्यकीय पुस्कालय में प्रथम दुमका साहित्य उत्सव 

 साहित्यिक गतिविधि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन 16 एवं 17 अप्रैल 2022 को राज्यकीय पुस्कालय में प्रथम दुमका साहित्य उत्सव आयोजित करेगा. इस कार्यक्रम में देश भर के कई प्रख्यात लेखक एवं कवि भाग लेंगे और पुस्कालय के महत्व,कला-संस्कृति ,समाज, प्रकाशन, यात्रा, वन्य जीवन, भाषा आदि विषयों पर साहित्य के प्रभाव के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा प्रस्तुत करेंगे. दुमका जिला में शिक्षा, साहित्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से  यह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. अधिक से अधिक लोग इस महोत्सव का हिस्सा बने, इसके लिए जिला प्रशासन विभिन्न गतिविधियों से लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है.

ये साहित्यकार होंगें शामिल

दो दिवसीय इस साहित्य समागम में देश के साहित्य अकादमी पुरस्कार नीलोत्पाल मृणाल, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त उपन्यासकार एवं समालोचक श्चंद्रहास चौधरी, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथाकार एवं भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रजत उभयकर, वाणी प्रकाशन की कार्यकारी निदेशक अदिति महेश्वरी, विख्यात पक्षी विज्ञानी एवं संरक्षणवादी  विक्रम ग्रेवाल एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक मिहिर वत्स जैसे प्रसिद्ध साहित्यकार भाग लेंगे.

1950 के दशक में स्टेट लाइब्रेरी (1956 में स्थापित)

प्रथम दुमका साहित्य उत्सव में पहले दिन अलग-अलग सत्र आयोजित होंगे. दूसरे दिन समापन सत्र के अतिरिक्त तीन से चार अलग-अलग सत्रों में पुस्तकों पर चर्चा की जाएगी. इन सत्रों में लेखक पुस्तक के संबंध में विचार रखेंगे एवं इसके बाद पुस्तक पर चर्चा होगी और सत्र में प्रश्नोत्तर भी होंगे. दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल भी लगाए जाएंगे. जिसमें लोगों को कई प्रकार की जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी. ऐतिहासिक भ्रमणशील पुस्तकालय का जीर्णोद्धार किया गया है. इसका उपयोग 1950 के दशक में स्टेट लाइब्रेरी (1956 में स्थापित) द्वारा किया गया था. अब फिर से उसका उपयोग कराए जाने को लेकर सुसज्जित किया गया है. जल्द ही लोग इसे एंटीक के तौर पर इस्तेमाल कर पाएंगे.

 भ्रमणशील पुस्तकालय वाहन का एक बार फिर लोग करेंगे दीदार

यह ऐतिहासिक भ्रमणशील पुस्तकालय 1956 में स्थापित दुमका के राजकीय पुस्तकालय को 1958 में उपलब्ध कराया गया था. यह मोबाइल लाइब्रेरी वैन फारगो ट्रक की चेसिस पर बने उक्त लाइब्रेरी वैन को चलाने में हर तीन किमी पर एक लीटर ईधन की जरूरत होती थी. 1974 तक पूरे संताल परगना में पुस्तकप्रेमियों तक पहुंच का माध्यम रहा. राजकीय पुस्तकालय संताल परगना की कभी शान रहे भ्रमणशील पुस्तकालय वाहन का एक बार फिर लोग दीदार करेंगे. एक बार फिर से भ्रमणशील पुस्तकालय वाहन को राजकीय पुस्तकालय का आकर्षण बनाया गया है. इसका रंग-रोगन होगा और विशिष्ट संग्रह के रूप में इसका लोग आनंद जल्द ही ले पाएंगे.

फारगो ट्रक में लदी रहती थी चार साइकिलें

76277 किमी चलने के बाद अमेरिकी कंपनी फारगो ट्रक में बना यह भ्रमणशील पुस्तकालय वाहन 1974 से यूं ही पड़ा हुआ था. अब राजकीय पुस्तकालय के कायाकल्प के साथ-साथ इस भ्रमणशील पुस्तकालय वाहन को भी सजाया गया है. संताल परगना के सुदुरवर्ती इलाके के पुस्तकप्रेमियों तक पहुंचनेवाला यह वाहन अपने साथ एक ट्रॉली भी लेकर चलता था. जिसमें चार साइकिल लदी रहती थी. इस वाहन के गांवों में न पहुंचने की स्थिति में साइकिलों से ही पाठ्य सामग्री व समाचार सूचनाएं पहुंचायी जाती थी.  

एनआइसी सर्वर से पुस्तकों की उपलब्धता की मिलेगी जानकारी

जिला प्रशासन  ने ध्यानाकृष्ट करते हुए राजकीय पुस्तकालय को संवारने की पहल की. उन्होंने इसके लिए शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की यहां प्रतिनियुक्ति की. पुस्तकों की सूची तैयार करायी. अब उसकी कैटलागिंग हो रही है. एनआइसी के सर्वर में बने दुमका जिले के बेवसाइट में डाला गया है,ताकि लोग पुस्तकों की उपलब्धता के बारे में जानकारी हासिल कर सकें.  

रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका

Tags:News

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