हज़ारीबाग (HAZARIBAGH) - रामनवमी महापर्व की तैयारी बिहार और झारखंड में जोर शोर से चल रही है. हजारीबाग में भी लोग रामनवमी की तैयारी में जुट गए हैं. पूरा शहर महावीरी झंडा से पटा हुआ है. बाजार में भी महावीरी झंडा बिक रहे हैं. लेकिन भारत की गंगा जमुनी संस्कृति की पूरी झलक हजारीबाग के रामनवमी बाजार में भी देखने को मिल रही है. बड़ा बाजार स्थित एक झंडे की दुकान में पिछले 30 वर्षोंं से मोहम्मद गुलाम जिलानी महावीरी झंडा बनाकर ना सिर्फ लोगों की जरूरतें पूरी कर रहे हैं बल्कि उन्हें इस काम से आत्मीय संतुष्टि भी मिल रहा है. गुलाम जिलानी द न्यूज़ पोस्ट से बात करते हुए कहा कि इस काम में हमें बहुत मन लगता है. ऊपर वाले ने मुझे इस योग्य बनाया कि वह ना सिर्फ अपने मुस्लिम समाज के लिए झंडा बनाता हूं बल्कि हर धर्म का झंडा बनाते हैं. जिससे उन्हें काफी आनंद मिलता है. उन्होंने इस मौके पर लोगों को एकजुट होकर तमाम तरह के त्यौहार को मनाने की अपील भी की है.
तीन दिनों तक मनायी जाती है रामनवमी
कोरोना के दो साल के बाद हजारीबाग में इस बार रामनवमी की झांकी और जुलूस निकलेगी. लिहाजा दुकानदार भी काफी खुश हैं. दुकानदारों का कहना है कि पिछले दो वर्षोंं से कमाई बिल्कुल ठप सी हो गई थी, लेकिन इस बार कोरोना का ना के बराबर असर होने के कारण बाजार में रौनक भी बढ़ी है और ग्राहक भी आ रहे हैं. बता दें कि बिहार झारखंड में हजारीबाग जिला ही एक ऐसा जिला है जहां तीन दिनों तक रामनवमी का महापर्व मनाया जाता है. इन तीन दिनों में सौ से अधिक झांकियां हजारीबाग शहर के मुख्य मार्गों पर निरंतर भ्रमण करती हैं. इसे देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में इस बार बढ़ती महंगाई का और सरकार के द्वारा दी गई रामनवमी जुलूस को लेकर दिशा निर्देश से राम भक्त थोड़े मायूस जरूर नजर आ रहे हैं. राम भक्तों का कहना है कि पिछले दो साल से रामनवमी महापर्व अच्छे से नहीं मना सके हैं. इस बार कोरोना की लहर अब ना के बराबर है. ऐसे में तैयारी भी जोर शोर से की जा रही है. लेकिन महंगाई भी अपनी चरम सीमा पर है. बाबजूद इसके उत्साह में कोई कमी नहीं है. बजट पर थोड़ा असर जरूर पड़ रहा है. इतना ही नहीं सरकार के द्वारा 10 बजे रात्रि तक ही जुलूस निकालने का आदेश जारी किया है. उसमें भी डीजे पर प्रतिबंध लगाया गया है. जो कहीं ना कहीं गलत है. सरकार से राम भक्त ने तमाम पाबंदी हटाने का आग्रह भी किया है.
रिपोर्ट : राकेश कुमार, हज़ारीबाग
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