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हाय महंगाई..! तेल की कीमत कम होने के नहीं कोई आसार          

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 6:52:07 AM

धनबाद (DHANBAD) -  महंगाई की मार से जनता बेहाल है. लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं है. सरकार चाहे केंद्र की हो या फिर राज्य की, सब एक ही राह पर चल रही है. कोयलांचल की बात की जाए तो पेट्रोल और डीजल शतक लगा चुके हैं. रोज-रोज इसके दाम में बढ़ोतरी हो रही है. इस बढ़ोतरी से सरकारों का कोष तो बढ़ रहा है. लेकिन जनता किन परेशानियों से गुजर रही है, इसका ध्यान किसी को नहीं है. डीजल महंगा होने का असर बाजारों पर साफ दिख रहा है. हर सामान के दाम में वृद्धि हो गई है. पूछने पर विक्रेताओं का एक ही जवाब है कि हम क्या करें-सब के दाम बढ़ गए हैं. ट्रांसपोर्टिंग महंगा हो गया है. सबसे बड़ी बात है कि शतक लगाने के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर नहीं हुए है. लगातार उसमें बढ़ोतरी जारी है. यह वृद्धि कहां जाकर रुकेगी, यह कहना बहुत ही कठिन लग रहा है. झारखंड की बात करें तो पेट्रोल पर ₹25 सब्सिडी का झुनझुना थमा कर सरकार अपनी खूब पीठ थपथपाई. लेकिन इसका फायदा किसको कितना मिल रहा है, इसका आकलन करने में सरकार फिसड्डी साबित हुई है. बता दें कि धनबाद ज़िले की आबादी 29 लाख है और 26 जनवरी से लेकर फ़रवरी तक केवल 14 ,662 लोग ही इसका लाभ ले रहे हैं. मार्च में यह आंकड़ा और कम हो गया है. 

झारखंड सरकार के वैट की क्रोनोलॉजी

अब जरा सा झारखंड सरकार के वैट की क्रोनोलॉजी समझिए. जब झारखंड में गठबंधन की सरकार अस्तित्व में आई थी. उस वक्त पेट्रोल पर 12. 50 रुपए और डीजल पर 9.46 रुपया वेट था. जो कि 27 महीने में बढ़ कर पेट्रोल पर 18.97 और डीजल पर 17.98 रुपए हो गया. अगर इसका गुणात्मक आकलन करें तो पेट्रोल पर 50 फ़ीसदी और डीजल पर 100% वृद्धि हुई है. आम लोग इधर सवाल उठा रहे हैं कि झारखंड सरकार में शामिल कांग्रेस का जो महंगाई के खिलाफ आंदोलन चल रहा है, उसमें जनता की भागीदारी बहुत नहीं दिख रही है. बात भी सच है, अगर झारखंड सरकार चाहे तो वैट घटाकर जनता को राहत दे सकती है. लेकिन राहत देने के पक्ष में कोई दिख नहीं रहा है. केंद्र सरकार ने पिछले दिनों पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के कारण तेल कंपनियों को कीमत बढ़ाने से रोक दिया था. उस अवधि में कंपनियों का नुकसान बढ़ता गया.

पेट्रोल-डीजल पर प्रति लीटर और 14 रुपये बढ़ेंगे : अशोक सिंह 

अब कंपनियां हाथ खोल कर अपने नुकसान की भरपाई कर रही है तो इसकी भरपाई तो आखिर जनता को ही करनी होगी.  मर कर  करिए या जी  कर करिए, हंसी- खुशी करिए या परेशान होकर करिए, बोझ तो आम जनता को ही उठाना पड़ेगा. डीजल पेट्रोल के दाम में लगातार वृद्धि से उपभोक्ता भी परेशान और तबाह हैं.  उपभोक्ता आलोक विश्वकर्मा का मानना है कि डीजल में वृद्धि  से पूरे घर का बजट बिगड़ जाता है क्योंकि एक साधारण परिवार बहुत सीमित बजट से अपना परिवार चलाता है.  मणिन्द्र  कुमार का कहना है कि अब तो जरूरी काम भी निपटाना मुश्किल हो गया है.  मुमताज कुरैशी का मानना है कि डीजल -पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर सरकार लोगों को परेशान कर रही है.  सरसों तेल की कीमत इतनी ज्यादा हो गयी है कि अब घर में इस्तेमाल करना सबके बस की बात नहीं है. वही बजरंगी कुमार यादव का कहना है कि झारखंड की हेमंत सरकार चाहे तो मूल्य कम हो सकता है. इधर ,झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह का कहना है कि सरकार चाहे केंद्र की हो या राज्य की, सब का एक ही हाल है. अभी आगे पेट्रोल -डीजल पर प्रति लीटर 14 रुपये की वृद्धि होगी.  यह बात जरूर है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत पर मूल्य निर्धारित होता है लेकिन केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी इतना बढ़ा दिया है कि दाम में अप्रत्याशित उछाल आया है. 

सरकार चाहे तो रास्ते अनेक हैं ,जनता को भी लाभ मिलेगा और सरकार को भी

हालांकि पांच और 10 रुपए की कटौती केंद्र सरकार ने पहले की थी लेकिन उसका बहुत लाभ लोगों को नहीं मिलता दिख रहा है. दूसरी और अगर प्रदेश की बात करें तो यहां टैक्स प्रतिशत पर होता है.  दाम बढ़ने से राज्य के टैक्स की राशि स्वतः बढ़ जाती है. जिसका नतीजा है कि मंगलवार को पेट्रोल 107.93 रुपए और डीजल 101.21 रुपए प्रति लीटर मूल्य पर मिल रहा था. वहीं बीपीएल कार्ड धारियों को सब्सिडी की बात को बेईमानी मानते हुए उन्होंने कहा कि यह तो विरोधाभास वाली बात है कि एक तरफ सरकार कहती है कि जिसको स्मार्टफोन हो, बाइक हो, घर हो, वह बीपीएल कार्ड धारी नहीं हो सकता. दूसरी ओर बाइक में पेट्रोल के नाम पर बीपीएल धारियों को सब्सिडी की घोषणा करती है. अशोक सिंह के अनुसार कम से कम डीज़ल और पेट्रोल में अभी 14 रुपए की और बढ़ोतरी सम्भव है. इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने ने मांग किया है कि 22% के बजाय राज्य सरकार द्वारा घोषित डीज़ल पर अधिकतम 12.50₹ और पेट्रोल पर 17₹ प्रति लीटर वैट राज्य सरकार को लेना चाहिए ताकि जनता को महंगाई से राहत मिल सके. जेपीडीए अध्यक्ष के अनुसार एसोसिएशन लगातार मांग करता रहा है कि झारखंड में वैट को घटाया जाए और एसोसिएशन का दावा है कि वैट घटने से राज्य सरकार की आमदनी बढ़ेगी लेकिन इस पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है.

क्या कहते हैं धनबाद के अपर जिला दंडाधिकारी (आपूर्ति )

इधर, धनबाद के अपर जिला दंडाधिकारी (आपूर्ति )भोगेन्द्र  ठाकुर का कहना है कि धनबाद फ़रवरी तक जिले में 14662 लोग सब्सिडी योजना का लाभ लिए हैं.  उन्होंने बीपीएल धारियों से अपील की कि वह आगे आएं और इस योजना का लाभ लें, प्रक्रिया बहुत सरल और व्यवहारिक है.  आपको बता दें कि धनबाद जिले की आबादी 29 लाख के करीब है अगर उसमें 14662 लोग ही सब्सिडी योजना का लाभ ले रहे हैं तो यह ऊंट के मुंह में जीरा के समान नहीं तो और इसे क्या कहेंगे.

रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह, धनबाद

Tags:News

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