देवघर (DEOGHAR) - देवघर और इसके आसपास के क्षेत्र में साइबर अपराधियों का इतना तगड़ा नेटवर्क बन गया है कि पुलिस को भी उसे भेदने में कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है. एक कहावत है कि तू डाल डाल तो मैं पात पात. इस कहावत को देवघर पुलिस चरितार्थ करने में पूरी ताक़त झोंक रही है. इसके लिए देवघर पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़ी कुछ तथ्यात्मक आंकड़े इकट्ठे पर जिला के अलग अलग क्षेत्र में इनके मोडस ऑपरेंडी का बारीकी से अध्ययन कर साइबर अपराध पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है. इसकी जानकारी देते हुए देवघर के साइबर डीएसपी सुमित प्रसाद ने बताया कि साइबर अपराध करने के तरीके के आधार पर अलग अलग थाना क्षेत्रों को वर्गीकृत किया गया है.
बैक अधिकारी बनकर खाते से उड़ा लिए जाते हैं पैसे
साइबर अपराध को रोकने के लिए उदाहरण के तौर पर देवघर के मोहनपुर, सोनारायठाड़ी और सारवां थाना क्षेत्र में ज्यादातर साइबर अपराध सरकारी योजनाओं को निशाना बना कर अंजाम दिए जा रहे है. इनमें श्रम कार्ड,प्रधानमंत्री किसान निधि योजना या अन्य सरकारी योजनाओं में ऑन लाइन माध्यम से राशि के लेनदेन को इनके द्वारा निशाना बनाया जा रहा है. वहीं मारगोमुण्डा और पालोजोरी थाना क्षेत्र में गूगल पे या अन्य ऐप्प के जरिये लोगों के साथ ठगी की जा रही है. जबकि मधुपुर और पथरोल इलाके में इनके द्वारा बैक अधिकारी बन कर बैंक खाता से पैसे उड़ाने या लॉटरी के जरिये पैसे खाता में ट्रांसफर करने का प्रलोभन देकर लोगों के साथ ठगी करने की कोशिश हो रही है.
गूगल ऐप्प के जरिए हो रही साइबर ठगी
साइबर डीएसपी ने बताया कि इनमें से जो गूगल ऐप्प के जरिए साइबर ठगी कर रहे हैं, उनके द्वारा मोटी रक़म की ठगी की जा रही है. देवघर पुलिस द्वारा ऐसे तकरीबन 50 बड़े साइबर अपराधियों की सूची तैयार की गई है और ऐसे नामी-गिरामी साइबर अपराधियों को गिरफ्त में लेने की कोशिश की जा रही है. देवघर पुलिस द्वारा झारखंड के बाहर भी ऐसे साइबर अपराधियों के लिंक खंगाले जा रहे हैं और उन्हें रिमांड में लिया जा रहा है. ताकि इनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके. उधर देवघर एसपी धनंजय कुमार सिंह द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेन्टर के थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट से भी मदद लेने की कोशिश की जा रही है.
रिपोर्ट : रितुराज सिन्हा, देवघर