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राख में तब्दील हो रही जंगल की हरियाली, जिम्मेदार कौन..?

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 4:20:34 PM

लोहरदगा (LOHARDAGA) - लोहरदगा के हजारों एकड़ भूमि में फैला जंगल इन दिनों आग की वजह से नष्ट हो रहा है. इन जंगलों में ग्रामीणों के द्वारा महुआ चुनने को लेकर आग लगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. वन विभाग को इसकी जानकारी हमेशा से ही रही है. लेकिन इन जंगलों को बचाने की बजाय वन विभाग सांप निकल जाने के बाद लकीरों को पीटते हुए दिखाई देती है. लोहरदगा के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं, जंगलों में फैली आग के बचे इन राखों से साफ तौर पर पता चलता है कि आग कितनी भयावह है. इन जंगलों में लगाई गई आग के कारण जंगलों के हरे-भरे पौधे और जंगली जीव जंतु भी आग की चपेट में आकर नष्ट हो रहे हैं. ग्रामीणों की माने तो जंगल में पेड़ से गिरने वाले महुआ के फूल को चुनने के लिए जंगल में आग लगाया जाता है. ताकि महुआ के फूल चुनने के लिए जंगल साफ हो सके.

अपने दर्द को बयां करता जंगल

ग्रामीणों द्वारा लगाई गई यही आग धीरे धीरे इन जंगलों को धुआं और राख में तब्दील कर देती है. चंद पैसों के लिए करोड़ों की संपत्ति जलाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. लेकिन इस दिशा में ना तो अभी तक विभाग जागरूक हो पाया है और ना ही राज्य सरकार ने ग्रामीणों के लिए इतनी व्यवस्था दी है कि रोजगार के लिए वह इन जंगलों को आग के हवाले ना करें. जलते हुए जंगल अपने दर्द को बयां करने के लिए काफी है. इन हरे भरे पौधों ने प्रतिवर्ष खुद को जलते और राख में तब्दील होते हुए पाया है. इन जंगलों में ही उत्पन्न होने वाले महुआ इन जंगलों को नष्ट करने का कारण बन रहा है. अब देखने होगा की जंगलों को बचाने का दावा करने वाला वन विभाग इसके लिए कितनी तैयार हैं.

वन विभाग गंभीर

लोहरदगा के डीएफओ का कहना है कि विभाग जंगल में फैली आग को लेकर गंभीर है. इन्होंने कहा की महुआ चुनने वालों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया गया है. साथ ही  उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के द्वारा महुआ चुनने को लेकर इन जंगलों को बर्बाद करने का काम कर रहे हैं. ऐसे में वन क्षेत्र में वनरक्षी को सक्रिय कर दिया गया है. साथ ही लगाए गए आग को बुझाने की दिशा में भी निरंतर कार्य किया जा रहा है.

 महुआ के लिए लगाया जाता है जगंलों में आग

वन विभाग इस बात से बेहतर तरीके से वाकिफ हैं कि झारखंड का जंगल महुआ के आग में प्रतिवर्ष राख में तब्दील होता है. ऐसे में वर्ष भर कदम उठाने और जागरूकता फैलाने के बजाय सिर्फ कोरम पूरा करने की दिशा में ही काम क्यों किया जाता है. क्योंकि यह आग इस इलाके के हजारों बेजुबान जीवों को अकाल मौत की ओर खींच कर ले आता है. साथ ही स्वभावित रूप से ऑक्सीजन उत्पादन करने और बारिश में सहयोग करने वाले इन जंगलों का अस्तित्व ही जब राख में तब्दील हो रहा है, तो मानव जीवन कितना सुरक्षित होगा यह हमें समय रहते जानने और समझने की आवश्यकता है.

रिपोर्ट : गौतम लेनिन, लोहरदगा

Tags:News

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