✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

देवी धाम में चैती नवरात्र मेला आरंभ, तांत्रिक पूजा और सिद्धि प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध है देवीधाम

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 4:29:59 AM

पलामू(PALAMU): जिला के हैदरनगर स्थित देवी धाम परिसर में चैत्र नवरात्र पर लगने वाला मेला प्रतिपदा से ही शुरू हो गया है. वर्षों पुराना मेला कोरोना के कारण दो सालों में नहीं लगा.  मगर इस साल पाबंदी हटी है, तो चैत्र नवरात्र पर मेला लग गया है.  मेला में बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे हैं.  

पलामू जिला मुख्यालय से महज 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैदरनगर देवी धाम ऐतिहासिक, धार्मिक और  पौराणिक कारणों से अंतरराज्यीय स्तर पर आस्था का केन्द्र बन गया है.  इस धाम में ना सिर्फ झारखंड  बल्कि उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के साथ साथ पूरे देश के श्रद्धालु पहुंचते हैं.  मान्यता है कि यहां पहुंच कर पूजा-अर्चना करने से लोगों के मनोवांच्छित कार्य पूर्ण हो जाते हैं.  एक तरफ लोग पूजा अर्चना करते हैं, तो दूसरी तरफ ओझा अथवा तांत्रिक टोना, झाड़फूंक और  सिद्धियों से प्रेत-बाधा के प्रकोप से बचाव के लिए देवी की भी उपासना में लीन होते हैं.  आस्था कहे या अंधविश्वास देश भर से प्रेत प्रकोप से शांति के लिए लोग यहां खींचे चले आते हैं. प्रेत समाहित व्यक्ति खासकर महिलाएं हवन कुंड और  माता मंदिर के समक्ष स्वयं ही झूमने लगते हैं.  जो अपने आप में आश्चर्य का विषय है.

 कभी झोपड़ियों में स्थापित

सात पिंडी स्वरूप माता अब गगनचुंबी भव्य मंदिर में विराजमान हैं. इनकी प्रतिष्ठित मूर्ति काले पत्थर से बना हुआ है. जिसमें माता के सात रूप को दर्शाया गया है. जिन पर चांदी का कवर चढ़ा हुआ है.  इसके साथ ही माता के ऊपर चांदी से बनी छतरी लोगों का मन मोह लेती है.

इस धाम के इतिहास के

जानकर कुंडल तिवारी बताते हैं कि वैसे तो इस देवी धाम का लिखित इतिहास दर्ज नहीं है. लेकिन इस मंदिर को उन्होंने अपने पूर्वजों से इसके सैकड़ों वर्षों से मौजूदगी की बात सुनी है. सबसे पहले इस मंदिर में यहां के स्थानीय पंडित दामोदर दुबे के समय आयोध्या से रामलीला मंडली  के साथ नागाबाबा आए थे. नागाबाबा रामलीला मंडली के अच्छे व्यास भी थे. जो अयोध्या के प्रमोद वन के चेतन दास अखाड़ा से थे. चेतन दास नागाबाबा के गुरु थे.  दामोदर दुबे ने नागाबाबा को देवी धाम पर ही रुक कर पूजा करने का अनुरोध किया.  जिसके बाद से नागाबाबा ने पूजा अर्चना के साथ साथ मंदिर में कई विकास किए. सबसे पहले उन्होंने ही पत्थरों पर नकासी वाले खम्भों पर मंदिर का निर्माण कराया.  नागाबाबा के बाद उनके  गुरुभाई मुनि बाबा पूजा अर्चना करने लगे. उन्होंने मंदिर का गोलनुमा गुम्बज का निर्माण कराया. मुनि बाबा के बाद उनके शिष्य सुरेंद्र दास त्यागी वर्तमान में मंदिर के गर्भगृह की पूजा अर्चना करते हैं. मंदिर प्रबंधन समिति के प्रयास, श्रद्धालुओं के सहयोग और चढावा में प्राप्त दान व अन्य से विशाल गुम्बज नुमा मंदिर का निर्माण कराया गया है.  हाल के वर्षों में प्रशासनिक पहल व हस्तक्षेप के साथ पर्यटन के दृष्टिकोण व श्रद्धालुओं की सुविधा के लिहाज से सौंदर्यीकरण व विकास के कई काम हुए हैं.  प्रबंधन समिति के पदेन अध्यक्ष बीडीओ बन गए हैं.

 

धार्मिक एकता की मिसाल

देवी धाम मंदिर का प्रांगण में सप्त माता के विशाल गुंबदनुमा मंदिर के अलावा रामजानकी मंदिर, शिव पार्वती मंदिर, विशाल पीपल के पेड़ में ब्रह्मा स्थान के साथ-साथ जीन बाबा का मजार भी स्थापित हैं.  जहां मंदिर में माता की पूजा अर्चना के साथ ही जीन बाबा स्थान पर लाल मुर्गों को दाना चराने फातेहा देने की परंपरा भी है. शायद ही कोई श्रद्धालु उनके दर्शन के बगैर लौटते हैं.  देवी धाम ane वाले श्रद्धालु भाईबिगहा स्थित कर्बला पर भी फातेहा करते हैं.  यह सब मन्नत मानने व इसके पूरा होने पर किया करते हैं.  यही वजह है कि देवी धाम धार्मिक एकता व भाईचारे का मिसाल बन गया है.  मुख्य द्वार के सामने ही विशाल हवन कुंड है.  जहां पर प्रेत-बाधा से ग्रस्त ओझा-गुणियों की मौजूदगी में स्वयं झूमने नाचने लगते हैं.  ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से माता ही इनके कष्ट हर लेती है.  जिनमें संतान सुख,धन, वैभव शांति की प्राप्ति व व्याधियों से मुक्ति की मन्नत मांगी जाती है.

चीनी के मिठाई का है महत्व

देवी धाम पर प्रसाद के रूप में चीनी की मिठाई ही देवी मां को अर्पित किया जाता है. इसका कारण यह है कि चीनी के मिठाई को शुद्ध माना जाता है.  इसमें किसी प्रकार का तेल का उपयोग नहीं किया जाता है. इसके भी विशेष कारण बताए जाते हैं. बताया गया कि वर्षों पहले या यू़ं कहे शुरूआत से ही जमुहार (औरंगाबाद, बिहार) से यहां बसे हलवाई परिवार का माता की स्थापना में विशेष योगदान रहा है.  आज भी संबंधित परिवार के दरवाजे पर यहां पहुंचे भक्त मत्था टेकने व विशेष अनुष्ठान के लिए पहुंचे वगैर नहीं रहते हैं.

मेला को लेकर अधिकारी रहे सक्रिय, मगर पानी की भी नहीं हो सकी व्यवस्था

मेला की तैयारी को लेकर 15 दिनों से अधिकारी प्रबंध समिति के साथ बैठकें कर रहे हैं.  मगर मेला शुरू होते ही व्यवस्था की पोल खुल गई.  पहले ही दिन पानी के लिए एक चापा कल पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही.  धाम परिसर स्थित सोलर संचालित जल मीनार भी है खराब. पीने के पानी की नहीं है कोई मुकम्मल व्यवस्था.  प्रबंध समिति के अध्यक्ष सह बीडीओ की अदूरदर्शिता मेले में आ रही है नजर.

रिपोर्ट:जफ़र हुसैन,पलामू   

Tags:News

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.