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अंजान शाह पीर बाबा के मजार पर सालाना उर्स शुरू, कौमी एकता का प्रतीक है पीर बाबा का मजार

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 5:40:30 AM

सिमडेगा(SIMDEGA) :कोलेबिरा थाना परिसर स्थित अंजान शाह पीर बाबा की मजार पर आयोजित दो दिवसीय वार्षिक उर्स की शुरुआत मंगलवार को हुई. सर्वप्रथम कोलेबिरा थाना प्रभारी रामेश्वर भगत ने पहली चादरपोशी पुलिस विभाग के ओर से की. उन्होंने मजार पर चादरपोशी कर जिले में अमन चैन की दुआ मांगी. प्रत्येक वर्ष की भांति इस सालाना उर्स के मौके पर प्रशासन द्वारा चादर पोशी पूरी धूमधाम से कर उर्स की शुरुआत की. तत्पश्चात नवाटोली अंजुमन के द्वारा चादर पोशी की गई. वहीं इससे पूर्व गुस्ले संदल व कुरानख्वानी की गई. मंगलवार को जायरीनो के बीच लंगर खानी होगी. वहीं 30 मार्च को रात में खानकाही कव्वाली का आयोजन किया गया है.

बाबा का मजार कौमी एकता का प्रतीक

इस दौरान सौहार्द की सदियों पुरानी गंगा जमुनी तहजीब दिखी. सभी धर्म संप्रदाय के लोगों ने एकजुट होकर शांति और खुशहाली के लिए चादर पोशी कर दुआएं मांगी. थाना प्रभारी ने कहा बाबा का मजार कौमी एकता का प्रतीक है. इस मजार पर हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सभी आस्था के साथ चादर चढ़ाते हैं और मन्नत मांगते हैं. जो लोग सच्चे दिल से मजार पर मन्नत मांगते हैं उनकी मन्नत बाबा जरूर पूरी करते हैं. इस मौके पर एएसआई नईम अंसारी मजार के खादिम अब्‍दुल बारिक हसन,अंजुमन कोलेबिरा सदर मुमताज आलम, शहजाद हसन, मिनहाज आलम,खजमुद्दीन अंसारी के अलावा गुमला से आए जायरीन शामिल थे.

ये है यहां मजार बनने की वजह

बता दें कि यह मजार हिन्दू- मुस्लिम एकता का परिचायक है. बाबा अंजान शाह के मजार में हर साल सभी धर्म संप्रदाय के लोग पहुंचते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं और बाबा सभी की मुरादें पूरी करते हैं. मजार शरीफ में हर साल दो दिवसीय उर्स का आयोजन होता है. इसमें झारखंड ,ओड़िशा, छत्तीसगढ़, बंगाल सहित अन्य राज्यों से हजारों लोग पहुंचते हैं और बाबा के मजार में चादरपोशी करते हैं. मजार शरीफ के बारे में बताया जाता है कि हजरत कयामुद्दीन बहादुर शाह जाफर के शासनकाल में बाबा अंजान शाह कोलेबिरा आए थे. कुछ अर्से के बाद वे पर्दा कर गए और वहीं पर उनका मजार ए अकदस बना दिया गया. वे अंग्रेजी सेना के कमांडो थे और वहीं पर उनका कैंप था. बताया जाता है कि ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा कोलेबिरा में थाना बनाने का निर्णय लिया गया था. जिस स्थान पर हजरत कयामुद्दीन बाबा की समाधि थी वहीं पर थाना बनाने का काम शुरू हुआ था. इसी दौरान कुछ अनहोनी हुई. बाद में बाबा के समाधि स्थल पर ब्रिटिश सरकार द्वारा एक मकबरा बनवाया गया. इसके बाद वर्ष 1911 ई. में यहां थाना शुरू हुआ और इसके बाद से आजतक लोग बाबा के दरबार में पहुंचकर अपनी मुरादें पूरी करते हैं और खुशी-खुशी वापस लौटते हैं.

रिपोर्ट: अमित रंजन, सिमडेगा

Tags:News

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