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पथरीली इलाके में ग्रामीण युवाओं ने मेहनत के बल पर मिट्टी में उगा दी मिठास, पढ़िए पूरी खबर

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 3:33:37 PM

लोहरदगा (LOHARDAGA) - लोहरदगा का पथरीला इलाका अब मिठास के लिए जाना और पहचाना जाता है. इस मिठास ने यहां के लोगों के रोजगार को बढ़ावा दिया है. सेन्हा प्रखंड के बरही गांव से लोग रोजगार के लिए बाहर जाया करते थे. लेकिन अब इस इलाके में बाहर से मिठास के व्यापारी पहुंच रहे हैं.

ईख के रुप में सामने आई मिठास

इस गांव की पहचान कभी पथरीले इलाकों के रूप में हुआ करती थी. लेकिन इस गांव ने जब से मिठास की पैदावार शुरू की गांव की रंगत ही बदल गई.  अब बरही गांव के किसान अपने मेहनत और लगन से प्रतिवर्ष लाखों रुपए कमा रहा है. यह सब केवल ग्रामीणों की सोच और साकारात्मक कार्य से संभव हो सका है. क्योंकि अब यह पूरा गांव मिठास की खेती में जुट गया है. बता दें कि यह मिठास ईख के रुप में सामने आई है. छोटे से स्तर से शुरू किया गया ईख की खेती ने अब पूरे बरही गांव में अपना जड़ जमा लिया है. यहां ईख की पैदावार बहुत ही बेहतर साबित हो रही है. किसान बताते हैं कि बरही गांव के ईख की मिठास ऐसी है कि खरीदार दूर दराज के इलाकों से आकर इनके खेतों ‌से ही इसे खरीद कर ले जाते हैं.  इन्हें इनके मेहनत का फल इन्हें अपने ही गांव घर के खेत में मिल रहा है.  ईख की खेती ने किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद किया है. बरही गांव में उत्पन्न ईख गांव के युवाओं को भी रोजगार दे रही है. इस गर्मी में गांव के युवा ईख का रस बेचकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने का काम कर रहे हैं.

जिल की बदलती सूरत

लोहरदगा जिला की पहचान कभी नक्सलवाद के रूप में तो कभी पलायन के रूप में या फिर कभी बच्चों के गायब होने के रूप में जानी जाती थी, लेकिन यहां के किसानों और ग्रामीणों ने अपनी मेहनत और लगन के बदौलत लोहरदगा की कहानी को ही बदल कर रख दिया. अब इनकी मेहनत ने लोहरदगा जिला की पहचान को फल और फूल के उत्पादन के लिए जाना जाने लगा है. कहीं आम की खेती तो कहीं फूलों की खेती तो कहीं ईख की खेती ने लोहरदगा में एक नया अध्याय जोड़ने की दिशा में कार्य किया है. डीसी लोहरदगा ईख की खेती पर किसानों के मेहनत की प्रशंसा करते हुए कहा कि ईख एक कैश क्रॉप व्यवसाय है. ऐसे किसानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में जिला प्रशासन सदैव आगे बढ़कर काम करेगा.

सही बाज़ार की ज़रुरत

कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकती, एक पत्थर दिल से उछालो तो यारों, शायद इसी कहावत को बरही गांववालों ने चरितार्थ कर दिया है. यहां के गांववालों ने पत्थर से मिठास निकालकर अपनी मेहनत लगन और विश्वास से दुनिया के सामने लोहरदगा जिले का एक नया स्वरुप पेश किया है. बस जरूरत है इन्हें बाजार उपलब्ध कराना और इनकी मेहनताने का वाजिब हक दिलाने की दिशा में कार्य करना. ताकि किसान प्रोत्साहित होकर और नए तकनीक के साथ अपने फसलों का उत्पादन कर सके.

रिपोर्ट : गौतम लेनिन, लोहरदगा

 

 

Tags:News

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