रांची (RANCHI) : नेतरहाट फायरिंग रेंज का विरोध लंबे समय से चल रहा है. इसी को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव भगत ने शनिवार को रांची प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता किया. उन्होंने कहा कि दो दिन पूर्व नेतरहाट की वादियों में ‘जान देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे’ नारा गूंजा है. उन्होंने कहा कि यह 1994 से लगातार जंगलों में गूंज रहा है. उन्होंने कहा कि नेतरहाट फायरिंग रेंज के लिए 1400 एकड़ जमीन चिन्हित किया गया है, जिससे 245 गांव विस्थापित होगा. इससे आदिवासी लोगों को काफी परेशानी होगी. उन्होंने बताया कि वे अप्रैल में पैदल मार्च कर राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे कि इस परियोजना को आगे न बढ़ाएं.
उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में सभी को अपने जीवन मे खुल कर जीने का अधिकार मिलता है. उन्होंने कहा कि फायरिंग रेंज सेना से जुड़ा हुआ मामला है. कारगिल युद्ध मे भी गुमला के कई लोगों ने देश के लिए जान न्योछावर किया है. उन्होंने कहा कि विकास के लिए बड़ी-बड़ी योजना बनाई गई है. इसमें सिर्फ आदिवासी विस्थापित हुए हैं. संविधान में यह लिखा हुआ है कि आदिवासी को बचाना और उनके खिलाफ़ कोई ऐसा काम नही किया जा सकता, जिससे आदिवासियों को नुकसान हो.
क्या आदिवासियों कि कीमत जंगली जानवरों से भी कम है?: सुखदेव भगत
वर्षों से लोग वहां निवास करते हैं. लेकिन, 245 गांव से विस्थापित होने के बाद वह कहां जाएंगे. उसी नेतरहाट के क्षेत्र में हाथियों का संरक्षण किया जा रहा है, साथ ही भेड़ियों का संरक्षण भी किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी लोगों को उजाड़ने से क्या मिलेगा? क्या आदिवासियों की कीमत जंगली जानवर से भी कम है? उन्होंने बताया कि फील्ड फायरिंग रेंज को रद्द करने को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन भी सौपा, लेकिन अब तक कुछ नही हुआ. सरकार अगर फिर से इसे बढ़ाती है तो आदिवासी लोगो को इसका दंश झेलना पड़ेगा.
रिपोर्ट: समीर हुसैन, रांची
