गुमला (GUMLA) : गुमला का सिसई विधानसभा क्षेत्र में पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव विधायक रह चुके हैं. उनके समय में जगह-जगह पर सड़क और पुलिया भी बनायी गई है. उसके बावजूद आधा दर्जन गांव आज भी सरकारी सुविधाओं का बाट जोह रहा है. सिसई प्रखंड क्षेत्र के सोगड़ा डबना पानी, सेमरा हरा टोली, करम टोली, पाकर टोली और नगर खुटियारी गांव के लोग आज भी ढ़िबरी युग में जीने को मजबूर हैं. इन गांव में आज तक कोई विधायक सांसद भी नहीं पहुंचे हैं ना ही कोई प्रखंड स्तरीय या जिला पदाधिकारी पदाधिकारी आए हैं. फिर यहां विकास कार्य कैसे हो सकता है. इन सब को देखते हुए ग्रामीणों ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि वे लोग सभी मिलकर इस बार के चुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे.
90 फीसदी लोग कर चुके हैं पलायन
गांव में उन्हें अभी तक सरकारी सुविधा और विकास का कोई भी लाभ नहीं मिला है. उनके गांव तक पहुंचने के लिए ना कोई सड़क है, ना कोई पुल- पुलिया. पगडंडियों से होकर उन्हें 3 किलोमीटर पैदल जाने के बाद सड़क मिलती है. बीच में नदी नाले भी होते हैं जिसे बरसात में पार करना असंभव हो जाता है. जिसके कारण बरसात के दिनों में ये गांव टापू हो जाते हैं, यहां के बच्चों का स्कूल आना जाना बंद हो जाता है. यही नहीं अगर किसी व्यक्ति की तबीयत ज्यादा खराब हो जाती है या इमरजेंसी की स्थिति होती है तो मरीज को खटिया में लादकर 3 किलोमीटर पैदल सड़क तक जाना पड़ता है. तब जाकर उसे कोई वाहन की सुविधा मिल पाती है. ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए साइकिल को उठाकर पार करना पड़ता है.
गांव में पेयजल की कोई सुविधा नहीं
बच्चों की शैक्षणिक स्थिति बदतर होती जा रही है. हरा टोली में एक एक स्कूल था जो जर्जर स्थिति में है. वहां कोई शिक्षक भी नहीं है और 3 साल से स्कूल बंद है. वहीं डबना पानी में स्कूल में मात्र एक शिक्षक है. ऐसे में बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है. गांव में पीने का पानी का कोई सुविधा नहीं है. उन्हें पुराने कुओं से पानी पीना पड़ता है. जबकि गर्मी के दिनों में वह भी नहीं मिल पाता और डांड़ी का पानी पीकर काम चलाना पड़ता है. स्वास्थ्य सुविधा की भी कमी है उन्हें इलाज के लिए 15 किलोमीटर दूर रेफरल अस्पताल सिसई पर निर्भर रहना पड़ता है. यहां तक कि लोगों को कोरोना वैक्सीन और बच्चों को किसी तरह के टीके दिलाने के लिए भी 3 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है. तब उन्हें यह सुविधा मिल पाती है. गांव में गिनती के लोगों को प्रधानमंत्री आवास मिला हुआ है. कई ग्रामीणों का राशन कार्ड भी नहीं है. मनरेगा 14 वीं-15वें वित्त या अन्य किसी सरकारी योजना से भी कोई योजना ग्रामीणों को अभी तक नहीं मिल पाया है. रोजगार की कोई सुविधा नहीं होने के कारण यहां से 90% लोग पलायन करके मजदूरी के लिए बाहर चले जाते हैं.
रिपोर्ट : अमित राज, सिसई, गुमला