धनबाद(DHANBAD) : तो क्या चिरकुंडा नगर परिषद क्षेत्र सिर्फ कागज पर ही ओडीएफ घोषित है? हम ये सवाल इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि जमीनी हकीकत दूसरी ओर इशारा कर रहे हैं. दरअसल, चिरकुंडा नगर परिषद क्षेत्र में आठ सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था. इनमें हर एक की लागत थी 24 लाख 48 हज़ार रुपए. लेकिन, इन सामुदायिक शौचालयों का उपयोग नहीं हो पाया है. वहीं, मॉडल शौचालय के रूप में भी नगर परिषद ने दर्जनों शौचालय बनवाए. एक की लागत दो लाख प्रति शौचालय आयी है. रख-रखाव नहीं होने से इन शौचालयों की हालत भी खराब है. 'सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम के तहत उपायुक्त संदीप सिंह जब आए थे, तो उन्होंने इसकी जांच कराने की बात कही थी. लेकिन, आगे कुछ नहीं हुआ.
प्रबंधक ने कहा शौचालय हैं चालू, लेकिन सच्चाई कुछ और
नगर प्रबंधक मुकेश रंजन से इस विषय में जब जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि सभी शौचालय चालू हैं. लेकिन सच्चाई यही है कि सभी शौचालयों में ताला लटका हुआ है. पूर्व पार्षद प्रोफेसर अरुण कुमार ने बताया कि शौचालय निर्माण में पैसे की बंदरबांट की गई है और इलाके के लोगों को ठगा गया है. उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है. वहीं दुकानदार अमरनाथ शर्मा का कहना है कि शौचालय तो 4 साल से बंद है.
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह, धनबाद