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धनबाद में कुत्ता काटे तो पॉकेट में सिरिंज लेकर जाइये अस्पताल !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 6:59:19 PM

धनबाद (DHANBAD) :  धनबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में  कुत्ता काटने के बाद दी जाने वाली दवा तो उपलब्ध है, लेकिन दवा लेने वालों को सिरिंज बाजार से खरीद कर लानी पड़ती है.  वह भी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर ,अब यहां सवाल उठता है कि इन सब को कौन देखेगा . झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता जो धनबाद के प्रभारी मंत्री भी हैं, उन्होंने हाल ही में धनबाद के दौरे के क्रम में कहा था कि धनबाद के एसएनएमएमसी अस्पताल ने जो रिक्वायरमेंट भेजी थी, उतनी राशि विमुक्त कर दी गई है.  अगर राशि विमुक्त  हो गई है तो फिर लोगों को 8-9 रुपए की सिरिंज  बाजार से 12 या ₹15 में क्यों खरीदनी पड़ रही है.  दुकानदार आखिर इतना साहस कैसे कर रहे हैं कि  एक सिरिंज  पर निर्धारित मूल्य से 4- ₹5 अधिक  कीमत ले रहे हैं.  

बाजार से सिरिंज खरीद कर जरूर लेते जाए

अस्पताल के अगल-बगल के दवा दुकानदारों की क्या कभी जांच पड़ताल होती है, क्या कभी पता किया जाता है कि उनके द्वारा जिस तरह दवाओं की बिक्री की जाती है, वह नियम अनुकूल है अथवा नहीं.  भगवान ना करे कि किसी को कुत्ता काट ले लेकिन अगर कुत्ता काट लिया है और आपको एंटी रेबीज इंजेक्शन की जरूरत है तो एसएनएमएमसीएच जाएं तो साथ में बाजार से सिरिंज खरीद कर जरूर लेते जाए, नहीं तो दवा की उपलब्धता के बावजूद सिरिंज के बिना आपको सूई नहीं मिल पाएगी.  यह कोई एक-दो दिन का हाल नहीं है, जानकार बताते हैं कि पिछले 3 महीने से ऐसा ही हो रहा है. अधिकारी सिर्फ तोता रट लगाते हैं कि प्रक्रिया चल रही है. जल्द ही सिरिंज अस्पताल में आ जाएगी, फिर सब कुछ सामान्य हो जाएगा.  यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि जिला में एसएनएमएमसीएच एकमात्र ऐसा अस्पताल है जहां जरूरतमंद लोगों को निशुल्क एंटी रेबीज इंजेक्शन मिलती है.  अमूमन रोज 75 से 80 लोग इंजेक्शन लेने आते हैं. 

एंटी रेबीज इंजेक्शन लेने के लिए कम से कम 4 बार लाइन में

भुक्तभोगियों  की माने तो एंटी रेबीज इंजेक्शन लेने के लिए लोगों को कम से कम 4 बार लाइन में लगनी  पड़ती है. एक लाइन में लगने के बाद ओपीडी में पंजीयन होता है, दूसरी लाइन में सर्जरी के ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए इंतजार करना पड़ता है.  तीसरी लाइन में ओपीडी के रूम नंबर एक में इंजेक्शन के लिए समय बिताना पड़ता है. सिरिंज  नहीं मिलने से भुक्तभोगियों को चौथी लाइन में भी लगनी पड़ती है.  तीसरी कतार में लगने के बाद जब मरीज टेबल पर पहुंचता है तो उसे बताया जाता है कि सिरिंज नहीं है. सिरिंज लेकर आएं तो दवा मिल जाएगी.  लाइन से निकलकर फिर उसे सिरिंज के लिए जाना पड़ता है और फिर आकर लाइन में  लगता है तब जाकर उसे कहीं सूई  लग पाती है, 

सिरिंज में लूट का हाल

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इंट्रेडर्मल एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है. यह इंजेक्शन स्किन में लगता है.  एक मरीज के दोनों माह में पांच -पांच यूनिट वैक्सीन लगाई जाती है.  इसके लिए जानकारों के अनुसार इन्सुलिन सिरिंज का इस्तेमाल होता है. सिरिंज  की कीमत 8 से ₹9 होनी चाहिए. लेकिन कॉलेज अस्पताल के आसपास की दवा दुकानों में इसकी कीमत 12 से ₹15 है.  वह भी इस दबंगता के साथ की लेना है तो लीजिए ,नहीं तो हम आपको बुलाए थोड़े ही हैं. 

Tags:News

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