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कागजों पर ही रूक रही पानी की बर्बादी, धनबाद के जलमीनार हैं इसके सबूत  

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
Published: March 18, 2022,
Updated: 2:32 PM

धनबाद (DHANBAD) : धनबाद में तो लोग  गर्मी शुरू होते ही बूंद- बूंद पानी को तरसने लगते हैं. हालात इतने भयावह हो जाता है कि काम धंधा छोड़कर पौ फटने के साथ ही लोग पानी की जुगाड़ में घरों से निकल पड़ते हैं.  कोलियरी इलाकों  की बात की जाए तो वहां के लोग पीट वाटर (खदान का पानी) से काम चलाने को विवश होते हैं.  कहीं-कहीं तो पानी में फिटकरी डालकर इससे पीने के काम में भी लाया जाता है. 

कहीं पूरा पानी तो कहीं मिलता ही नहीं है 
 
इधर,अगर शहरी इलाके की बात करें तो मैथन जलापूर्ति योजना के तहत पानी सप्लाई की  व्यवस्था में  कहीं पूरा पानी मिलता है तो कहीं मिलता ही नहीं है.  जानकारी के अनुसार शहरी क्षेत्र में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के 19  इस जल मीनार है लेकिन इन जल मीनारों के रखरखाव में  तो लापरवाही है ही. साथ ही पानी बर्बाद करने का यह जल मीनार एक माध्यम बन गए हैं.  अब आप पूछ सकते हैं कि यह सब कैसे, तो जान लीजिए जल मीनार में पानी भरता है तो इसकी पहचान पानी टपकने से की जाती है. मीटर या कोई ऐसा यंत्र नहीं है, जिससे कि मैं पानी चलाने वाला समझ सके कि  जल मीनार भरने ही वाले हैं.  पानी टपकने या बहने  के बाद सप्लाई बंद करने मैं जो भी वक्त लग जाता है, उससे लाखों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है.  

की मैन भी अंदाजा से ही बंद करते हैं सप्लाई 

कुछ जगहों पर तो की मैन (पानी चलने वाला )  अंदाज से ही सप्लाई बंद कर देते हैं.  नतीजा होता है कि टंकी भर जाने के बाद भी निचले इलाके में पानी तो मिल जाता है, लेकिन ऊंचे वाले क्षेत्रों तक पानी नहीं पहुंच पाता है.  जानकारी के अनुसार सभी जल मीनारों में दो  साल पहले ही मीटर लगाने की बात कही गई थी. लेकिन आज तक नहीं लगा.  इसका खामियाजा स्टील गेट , चिरागोरा , पुलिस लाइन, गांधीनगर सहित अन्य इलाके झेल  रहे हैं.  अब सवाल उठता है कि अगर जल मीनारों में मीटर लगाने का आदेश है तो फिर किन वजहों से मीटर नहीं लगाए गए हैं.  इसके लिए जिम्मेवार कौन है, क्या विभाग के अधिकारी जिम्मेवारी तय कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे  और हजारों -लाखों लीटर बेकार होते पानी को बचाने के लिए कोई उपाय करेंगे. 

Tags:News

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