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बूढा पहाड़ पर नक्सलियों में हड़कंप, कई नक्सली संगठन छोड़ हुए फरार

बूढा पहाड़ पर नक्सलियों में हड़कंप, कई नक्सली संगठन छोड़ हुए फरार

पलामू (PALAMU) : पलामू प्रमंडल के लातेहार और गढ़वा के सीमावर्ती और प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के सुरक्षित इलाकों में से एक बूढा पहाड़ से लगातार नक्सली भाग रहे हैं. पिछले 15 दिनों के भीतर दो बड़े नक्सली फरार हो गए हैं. अब 10 लाख के इनामी नक्सली मृत्युंजय भुइयां के फरार हो जाने की सूचना है. गत 27 और 28 फरवरी को झारखंड, बिहार और उतरी छत्तीसगढ़ के यूनीफाइड कमांड के टॉप कमांडर मिथिलेश मेहता बूढा पहाड़ से बीमारी का बहाना बनाकर फरार हो गया था. हालांकि उसे पुलिस ने बिहार के इलाके से गिरफ्तार किया था. बूढा पहाड़ छोड़कर भागने वाले नक्सली या तो सरेंडर कर रहे हैं या फिर पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले रही है.

अपने साथी के साथ फरार हुआ मृत्युंजय भुइयां

जानकारी के अनुसार नक्सली मृत्युंजय भुइयां अपने साथी के साथ फरार हुआ है. बताया जा रहा है कि मृत्युंजय भुइयां जल्द ही झारखंड पुलिस के समक्ष सरेंडर कर सकता है. मृत्युंजय लातेहार के छिपादोहर बरवाडीह स्थित चकलवा नावाडीह का रहने वाला है. मृत्युंजय माओवादियों का जोनल कमांडर व गढ़वा के भंडरिया कांड का आरोपी है.

मरकस बाबा को बूढ़ा पहाड़ की कमान

25 लाख के इनामी नक्सली मिथिलेश मेहता की गिरफ्तारी के बाद मरकस बाबा उर्फ सौरभ को बूढ़ा पहाड़ की कमान मिली है. मरकस बाबा उर्फ सौरभ भाकपा माओवादी संगठन के बिहार, झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश कमिटी का सदस्य है. झारखंड सरकार ने मरकस बाबा पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है. मरकस मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले का रहने वाला है और 2021 की शुरुआत से ही बूढा पहाड़ इलाके में डेरा डाले हुए है. इसके साथ ही कमांडर मिथिलेश मेहता और नवीन यादव का सहयोग कर रहा था.

बूढा पहाड़ पर माओवादियों का मात्र डेढ़ दर्जन कैडर

बीमारी का बहाना बनाकर बूढ़ा पहाड़ से फरार हुए मिथिलेश मेहता ने सुरक्षा एजेंसियों को बताया था कि बूढ़ापहाड़ पर उसके बाद 25 लाख का इनामी टॉप कमांडर सौरव उर्फ मरकस बाबा, नवीन यादव, मृत्युंजय भुइयां समेत 18 से 20 कैडर ही बचे हैं. मिथिलेश भुइयां और उसके सहयोगी के फरार होने के बाद कैडरों की संख्या में और कमी आयी है.

बता दें कि मिथिलेश मेहता को 2020 के अंतिम महीनों में बूढा पहाड़ का टॉप कमांडर बनाया गया था. 2021 से ही मिथिलेश मेहता बूढ़ा पहाड़ पर रह रहा था. इसी इलाके से माओवादी बिहार झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ सीमा पर अपनी गतिविधि का संचालन करते हैं. इस इलाके के अंतर्गत पलामू, गढ़वा, लातेहार, गुमला, सिमडेगा, चतरा, छत्तीसगढ़ का बलरामपुर और बिहार का गया, औरंगाबाद, रोहतास, सासाराम का इलाका शामिल है.

रिपोर्ट : जफ़र महबूब, मेदनीनगर/ पलामू  

 

Published at:17 Mar 2022 04:19 PM (IST)
Tags:News
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