रांची (RANCHI) : सदन के भीतर चूड़ी पहन लो, विधवा विलाप मत करो, लड़की की तरह मत रोओ... जैसे शब्दों का इस्तेमाल बंद हो. यह महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध है. झारखंड बजट सत्र के दसवें दिन शुक्रवार को महिलाओं के सम्मान में यह आवाज कांग्रेस विधायक पूर्णिमा सिंह ने उठायी. स्पीकर रबींद्र नाथ महतो को संबोधित करते हुए कहा कि उम्मीद जाहिर करती हूं कि आप जल्द ही इस पर पाबंदी लगाएंगे.
महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के बजट अनुदान पर शुक्रवार को चर्चा हो रही थी. इसी दौरान पूर्णिमा सिंह ने महिलाओं के सम्मान में आवाज बुलंद की. उन्होंने महिलाओं के हित में सरकार से कई मांगे की. कहा कि हर थाने में एक महिला आरक्षी हो. कई बार ज्यादातर मामलों में चार्चशीट भी नहीं हो पाता है. महिला आरक्षी होने से महिलाओं के मामले में संवेदनशीलता बरती जा सकेगी. महिलाओं के लिए लीगल असिस्टेंट की व्यवस्था की भी मांग की. कहा कि कई बार महिलाओं को कानूनी सलाह नहीं मिल पाती. वह अपने अधिकार भी नहीं जान पातीं.
पूर्णिमा सिंह ने जेंडर डिस्क्रिमिनेशन पर भी चर्चा की. झारखंड में महिला साक्षरता दर को बढ़ाने की बात कही. वहीं सदन में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने पर काम करने की बात कही.
