धनबाद(DHANBAD) - कतरास -चंद्रपुरा रेल लाइन पर ट्रेन चलाने की मांग को लेकर फिर एक बार बाघमारा- कतरास में राजनीति गर्म हो गई है.धनबाद -चंद्रपुरा रेल लाइन पर ट्रेन चलाने की मांग को लेकर एक दिन पहले जहां विधायक ढुल्लू महतो ने विधान सभा के सामने धरना दिया, वही दूसरे दिन जागो संस्था ने कतरास में धरना दिया और विधायक के धरने पर तंज कसा गया. बुधवार को बाघमारा के विधायक ढुल्लू महतो ने जहां झारखंड विधान सभा के सामने धरना दिया और कहा कि धनबाद चंद्रपुरा रेल लाइन पर जब मालगाड़ी और एक्सप्रेस ट्रेन चल सकती हैं तो 26 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनो को क्यों नहीं शुरू किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि डाउन एलेप्पी ट्रेन का कतरासगढ़ स्टेशन पर ठहराव नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कई ट्रेनें इस मार्ग से गुजर रही है लेकिन कतरासगढ़ स्टेशन पर उन ट्रेनों का ठहराव नहीं किया जा रहा है. ढुल्लू महतो ने कहा कि बंद सभी 26 जोड़ी ट्रेनों के परिचालन शुरू कराने तथा कतरासगढ़ स्टेशन पर सभी ट्रेनों के ठहराव को लेकर सदन में कई बार मामला उठाया ,लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
विधायक के धरने के एक दिन बाद कतरास में जागो संस्था ने दिया धरना
दूसरी ओर, आज गुरुवार को उनके विरोधी जागो संस्था की ओर से कतरास में 26 जोड़ी ट्रेनों को फिर से धनबाद- चंद्रपुरा रेल लाइन पर चलाने की मांग को लेकर धरना दिया गया. धरना जागो संस्था की ओर से चूना यादव के नेतृत्व में दिया गया. धरना में सिर्फ ट्रेन की मांग नहीं थी बल्कि राज्य सरकार से मांग की गई कि कोयले के अवैध उत्खनन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, नहीं तो पिलर पर खड़ा कतरास किसी भी दिन धंस सकता है. धरना में बियाडा के पूर्व अध्यक्ष विजय झा भी शामिल हुए, पूछने पर उन्होंने कहा कि हम लोगों का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था. इसके पहले विधायक ढुल्लू महतो ने धरना दिया, उनका धरना भी हास्यास्पद लगता है ,क्योंकि ट्रेन चलाने का जिम्मेवारी राज्य सरकार की नहीं है. अगर वह चाहते हैं कि ट्रेन चले तो केंद्रीय रेल मंत्री या रेल मंत्रालय पर दबाव बनाने की उन्हें कोशिश करनी चाहिए. बता दें कि 15 जून 17 को धनबाद चंद्रपुरा रेल लाइन को बंद कर दिया गया था. लम्बे एवं ऐतिहासिक आंदोलन के बाद 24 फरवरी 19 को फिर से शुरू किया गया. विजय झा कहना है कि जब इस रेल लाइन से शताब्दी और एलेप्पी गुजरती है तो इसका मतलब है कि जमीन के नीचे आग नहीं है. ऐसी हालत में 26 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों को नहीं चलाने की बात समझ से परे है.
