जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) - बात अगर सांप की आती है तो फिर चाहे महिला हो या पुरुष, सभी की डर से हालत खराब हो जाती है. वहीं अगर गलती से सांप किसी के घर या दफ्तर में आ जाए तो उसके विष के प्रति डर अच्छे-अच्छे की बोलती बंद कर देता है. अभी तक सभी ने पुरुषों को सांप पकड़ते हुए या डर के कारण उसे मारते हुए देखा और सुना होगा चुटकुलों में भी चूहा और कॉकरोच से डरने वाली महिलाओं का ही जिक्र होता है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मिलिए को झारखंड के जमशेदपुर की एक ऐसी महिला से जो इंसान को सांप से और सांप को इंसान से बचाने की मुहिम में जुटी हैं.
पूर्वी सिंहभूम जिला की रजनी लहा ने अपने परिवार का ध्यान रखते हुए बुटीक की दुकान चलाने के बाद भी इंसान को सांप से और सांप को इंसान से बचाने की मुहीम में जुटी हैं. जमशेदपुर शहर के चारों तरफ घने जंगल होने के कारण भूले भटके सांप अकसर शहर में आ ही जाते हैं. इसे देखने के बाद इंसान काफी घबरा जाते हैं और देखते ही सांप को मार कर उससे जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं. लेकिन जमशेदपुर का मानगो जो कि फॉरेस्ट इलाके का एक छोर है, वहां के लोग सांप देखते ही रजनी लहा को सूचित करते हैं. रजनी वहां पहुंच कर सांप को पकड़ कर बहुत ही प्यार से उसे जंगलों में छोड़ आती है. खतरों की खिलाड़ी रजनी लहा के साहस की जितनी सराहना की जाए कम है. घर परिवार, दुकान ,देखने के बाद घबराए लोग और घबराए सांप की मदद करना एक सराहनीय कार्य है.
रिपोर्ट : रंजीत ओझा, जमशेदपुर