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धनबाद में निकला बैंड, बाजा और बारात, सामूहिक विवाह में 30 जोड़े हुए एक-दूजे के, बारातियो के साथ -साथ शहर भी नाचा

धनबाद में निकला बैंड, बाजा और बारात, सामूहिक विवाह में 30 जोड़े हुए एक-दूजे के, बारातियो के साथ -साथ शहर भी नाचा

धनबाद(DHANBAD): धनबाद की सड़कों पर निकली बैंड, बाजा और बारात. टोटो पर सवार जब 30 दूल्हें परिजनों और सगे-संबंधियों सहित शहर वासियों के साथ बैंड बाजे के साथ सड़क पर नाचते, गाते बारात लेकर निकलें तो नजारा बहुत ही आकर्षक दिख रहा था. दरअसल, सर्वधर्म सामूहिक विवाह समारोह आज धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में आयोजित था. इस समारोह में 30 जोड़ियां एक दूजे के होने वाले थे और दुल्हनियां लाने के लिए दूल्हे बारात लेकर गोल्फ  ग्राउंड जा रहे थे. सुबह लगभग 10:30 बजे बारात हीरापुर हटिया चौक से निकली, जो रणधीर वर्मा चौक, लुबी सर्कुलर रोड होते हुए गोल्फ ग्राउंड पहुंची. सड़क के दोनों ओर देखने वालों की भीड़ थी और दूल्हों के चेहरे पर मुस्कुराहट.

पारंपरिक ढंग से बारातियों का स्वागत किया गया...

बारात जब गोल्फ ग्राउंड पहुंची तो पारंपरिक ढंग से बारातियों का स्वागत किया गया. पहले समधी-समधिनी मिलन हुआ, फिर वरमाला का कार्यक्रम किया गया. दूल्हों की आरती उतारी गई पान-फूल से स्वागत हुआ. उसके बाद मंच पर ले जाया गया. फिर सादगी के साथ 30 जोडों का एक साथ एक ही समय में वरमाला का रस्म पूरा हुआ. उसके बाद अग्नि को साक्षी मानकर दूल्हा-दुल्हन एक दूसरे के हुए. पारंपरिक रीति-रिवाज से पाणिग्रह विवाह हुआ. इस बार केवल हिंदू धर्म से जुड़े 30 जोड़ों की शादियां हुई. लेकिन, इसके पहले अपने नाम के अनुसार सर्वधर्म सामूहिक विवाह समारोह में सभी धर्म, मज़हब, जाति के लोगों का विवाह कराया जाता रहा है.

51 जोड़ों के विवाह से कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी

यह विवाह कार्यक्रम वर्ष 2016 से शुरू है, 51 जोड़ों के विवाह से इसकी शुरुआत हुई थी, जो कि धीरे-धीरे विस्तार पा रहा है. इस साल कोरोना के कारण केवल 30 जोड़ों की ही शादी हो पाई. शादी समारोह से खुश दूल्हा-दुल्हन ने न्यूज़ पोस्ट को बताया कि आज हमलोग बहुत ही खुश  हैं. उनके माता-पिता की आर्थिक हैसियत इतनी अधिक नहीं थी कि वह धूमधाम से विवाह कर सकें. लेकिन, आज यह शौक भी पूरा हो गया. बिना दहेज की शादियां हो गई, शादी कराने वाले पुजारी का भी यही कहना है कि धनबाद ने पूरे देश को एक संदेश देने का काम किया है कि दहेज अभिशाप है, इसे खत्म किया जाना चाहिए. सबसे बड़ी बात है कि आज के कार्यक्रम का यही संदेश निकला कि साम्प्रदायिकता का समाज में कोई स्थान नहीं है. हम भारत वासी एक हैं. क़ौमी एकता हमारी सांझी संस्कृति की विरासत है. तभी तो एक छत के नीचे अलग-अलग धर्म के लोगों का भी शादी, निकाह व मैरेज़ की सभी रस्में एक साथ हो सकती है. गंगा, जमुना तहज़ीब हमारी धरोहर है.

गरीबों की शादी भी उतनी ही धूमधाम से हो, जितनी अमीरों की होती है

शादियां दहेज रहित होनी चाहिए, गरीबों की शादी भी उतनी ही धूमधाम से हो, जितनी अमीरों की होती है. यही संदेश पूरे देश को धनबाद दे रहा है. सर्व धर्म सामूहिक विवाह समारोह के आयोजक प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि प्रशासन, पुलिस और आम जनता का भरपूर सहयोग कार्यक्रम में मिला है और यही कारण है कि 30 बेटियों के हाथ पीले करने में सफलता मिली है. शादी के बाद घर-गृहस्थ के जरूरत के सारे सामान समाज के लोगों की ओर से दिए गए. कुल मिलाकर 2016 में धनबाद से शुरू हुआ. अभियान वृहत आकार ले रहा है और समाज, देश और दुनियां को एक संदेश दे रहा है. विवाह बेटियों का हक़ है. उसे बिना दहेज़ के पूरा किया जाना चाहिए. साथ ही इस विवाह में सभी धर्मों के लोगों के शामिल होने से क़ौमी एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है.

रिपोर्ट: अभिषेक कुमार सिंह, ब्युरो हेड(धनबाद)

 

Published at:06 Mar 2022 07:27 PM (IST)
Tags:News
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