लोहरदगा (LOHARDAGA) - झारखंड अलग राज्य बनने के ठीक कुछ दिन पहले लोहरदगा के माथे पर नक्सलवाद के कलंक ने जिला को झकझोर कर रख दिया. बता दें कि तत्कालीन एसपी अजय कुमार सिंह की इन्हीं पेशरार के जंगलों में हत्या कर दी गई थी. नक्सलवाद से जिला लगातार जूझता रहा. चाहे वह धरधरिया सीरियल आईईडी ब्लास्ट का मामला हो, चाहे हरक नाथ महतो और गोपी चंद महतो की केकरांग में चुनाव के दौरान आईईडी ब्लास्ट में मौत का मामला हो, या फिर कहे तो इन्हीं पेशरार के जंगलों ने जिला को कई दंश देने का काम किया है. लेकिन अब लोहरदगा नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. पिछले दिनों लगातार अभियान चलाकर इन जंगलों से नक्सलियों को भागने के लिए मजबूर कर दिया गया.
हथियार छोड़ कर भागने को हुए मजबूर
नक्सलियों के एक साथ जमा होकर इन जंगलों में बड़ी बैठक करने की सूचना खुफिया विभाग के द्वारा मिलने पर लोहरदगा गुमला और लातेहार जिला की ओर से संयुक्त घेराबंदी की गई. लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान की वजह से 11 नक्सलियों को धरदबोचा गया. वहीं एक इनामी नक्सली जवानों के निशाने पर ढेर हो गए. पेशरार के जंगलों में पुलिस की दस बार नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हुई. लेकिन जवानों का हौसला कभी कम नहीं हुआ. बल्कि पुलिस के जवान और ज्यादा आत्मविश्वास के साथ नक्सलियों के विरुद्ध आगे बढ़े और बुलबुल के घनघोर जंगल से नक्सलियों को हथियार छोड़कर भागने में मजबूर कर दिया.
काली वर्दी की काली सोच
नक्सलवाद की कमर तोड़ दी गई है. लोहरदगा लातेहार और गुमला में नक्सलवाद के नाम पर कई लोगों को मौत के घाट उतारने वाली काली सोच को इन जवानों ने आइना दिखाया है. काले वर्दी की काली सोच ने लोहरदगा जिला के विकास को कई तरह से बाधित किया है. झारखंड अलग राज्य बनने के कार्यकाल से ही रखा है, लेकिन अब जवानों का हौसला बुलंद है. पेशरार के जंगलों में चले 8 फरवरी से चले डबल बुल अभियान के बाद अब चल रहे निरंतर सर्च अभियान ने नक्सलियों की नींद उड़ा दी है. आईजी अभियान एवी होमकर,एसपी प्रियंका मीणा और एएसपी अभियान दीपक पाण्डेय की रणनीति ने नासूर बन चुके नक्सलवाद के जड़ पर हमला कर उसे अंतिम सांसें लेने के लिए मजबूर कर दिया है. अभियान के बाद अब नक्सली लगातार आत्मसमर्पण नीति पर भरोसा कर आगे बढ़ने का कार्य कर रहे हैं. लोहरदगा में नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है, क्योंकि यहां के आमजनमानस में भी नक्सल कभी रास नहीं आया.
रिपोर्ट : गौतम लेनिन, लोहरदगा
