रांची(RANCHI) : झामुमो के पूर्व विधायक अमित महतो पार्टी छोड़ने के बाद सरकार को घेरने की तैयारी में जुट चुके हैं. वे अपने सिल्ली विधानसभा से अपने समर्थकों के साथ रांची की ओर कूच करते हुए रांची के टाटीसिलवे पहुंचे. जहां प्रशासन द्वारा उन्हें वहीं रोक दिया गया है. उन्होंने कहा कि वह संवैधानिक तरीके से आंदोलन जारी करेंगे और महामहिम को ज्ञापन सौंपेंगे. उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन को जमकर लताड़ा है.
गुरुजी के उलट चलते हैं हेमंत सोरेन
अमित महतो ने कहा कि हमारे आंदोलनकारी गुरुजी अस्वस्थ हैं और उनका बेटा उनसे बिल्कुल उलट चुका है. हेमन्त सोरेन गुरुजी से बिल्कुल उलटे चलते हैं. अगर गुरुजी पूरब चलने की बात कहते हैं तो वो पश्चिम चलते हैं. गुरुजी खतियान की बात करते हैं तो वे कहते हैं हमारे भारत के तमाम लोग एक हैं. ये तो कुछ विलंब हो गया. अगर हेमंत जी पहले होते और गुरुजी बाद में होते. मतलब हेमंत जी गुरुजी के पिता होते तो आज यह टकराहट नहीं होती. क्योंकि तब हेमंत जी होते तो झारखंड बनता ही नहीं. वो तो कहते कि सब बहुत बढ़िया चल रहा है, भारत हमारा देश है. ये स्थिति है हेमंत जी की सोच की. इसलिए हमने हेमंत जी से आग्रह किया था कि मैं एक महीने का मोहलत देता हूं. अगर आप खतियान आधारित नियोजन नीति और स्थानीय नीति परिभाषित नहीं करते हैं और ये जो बाह्य भाषा को जो आपने क्षेत्रीय भाषा बना रखा है उसे समाप्त नहीं करते हैं तो मैं एक महीने बाद पार्टी छोड़ दूंगा. और जब उन्होंने नहीं सुना तो मैंने पार्टी छोड़ दी. क्योंकि हमारा एक ही सपना है कि हमारे लोगों को मान, सम्मान और पहचान मिले. और यहां के बेटे -बेटियों को रोजगार मिले.
अगर रोजगार मिला होता तो कोई डीएसपी होता तो कोई बीडीओ
उन्होंने आगे कहा कि इन 21 सालों में कैसे हमारा रोजगार हमारे हाथों से फिसलता चला गया वो तो आप सब देख ही रहे हैं. हमारे बहुत सारे युवक और युवती अगर अभी नौकरी में होते, कोई BDO होता, कोई DSP होता, कोई CO होता, कोई टीचर होता. उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि आज जो हम इतने लोग उपस्थित हैं, मैं समझता हूं कि आज इतने लोग भी नहीं आते अगर सभी को रोजगार मिला होता.
पूरे राज्य में आंदोलन की स्थिति
उन्होंने कहा कि राज्य में हर तरफ लोग आंदोलित हैं. JPSC, JSSC, पोषण सखी, आगनबाड़ी सेविका, पंचायत सचिव, NHRM कर्मी, मनरेगा कर्मी रोज राजभवन जाते हैं और धरना प्रदर्शन करते हैं. मगर, उनकी बात नहीं सुनी जा रही है. राज्य में सिर्फ आंदोलन की स्थिति बनी हुई है. जिस दिन आंदोलन में ज्यादा भीड़ दिखेगा, मतलब समझ जाइए कि हमारे यहां बेरोजगारी है. उन्होंने कहा कि हम इसलिए महामहिम से मिलने जा रहे हैं और उनसे कहने जा रहे हैं कि हेमंत सोरेन जी के कहने और करने में बहुत फर्क है. हेमंत सोरेन हमारे माटी पुत्रों को छलने का काम कर रहे हैं. उन्हें सिर्फ पैसों की चिंता है. वे पैसे कमाने वाले मशीन बन गए हैं.
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