दुमका (DUMKA) - लगातार 5 से 6 दिनों तक अपनी आंखों से युद्ध के दर्दनाक नज़ारे देखे और झेले. वहां अचानक कर्फ्यू लग गयी. फूड स्टोर में खाना खत्म हो गया. लोग भूख से परेशान होने लगे. उनको बंकर में शिफ्ट किया गया...द न्यूज पोस्ट के वरिष्ठ संवाददाता पंचम झा ने यह अनुभव शेयर किए दुमका के दो छात्र आदित्य कुमार और अलक्मा आदिल ने. दोनों यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे. अचानक युद्ध छिड़ जाने के कारण दोनों छात्र यूक्रेन में ही फंस गए. भारतीय छात्रों को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने आपरेशन गंगा शुरु किया है. आपरेशन गंगा की वजह से दुमका के दोनों छात्र सकुशल घर वापस लौटे हैं.
बर्फबारी में खुले आसमान में 3 दिनों का इंतज़ार
छात्रों ने बताया कि बंकर में काफी भीड़ थी जिसके करण लोगों को असुविधा हो रही थी. बंकर से जब वे बॉर्डर पर पहुंचे तो वहां उन्हें 3 दिनों के इंतज़ार के बाद एयर लिफ्ट के लिए कर उनकी बारी आई. उनकी कई रातें बर्फबारी के बीच खुले आसमान के नीचे गुज़री. बॉर्डर का टेम्परचर -6 डिग्री होने के करण लोग वहां बेहोश हो रहे थे, लोगों के पैर नम होने लगे थे और उनकी हालत बेहद खराब हो चुकी थी. लेकिन इन सब के बाद जब उनकी घर वापसी हुई तो उनके खुशी का ठिकाना ही नहीं था. उसके सहयोग के लिए उन्होंने भारत सरकार और उनके द्वारा चलाया गया ऑपरेशन गंगा के लिए सरकार को धन्यवाद किया. वहीं अलक्मा आदिल के पिता का कहना हैं कि उनके परिवार को राज्य सरकार, केंद्र सरकार और भारत सरकार से लगातार सहयोग मिला हैं. उनका बेटा सही सलामत घर वापस आ गया है. इससे उन्हें काफी खुशी है.
रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका
