जामताड़ा (JAMTARA) - जामताड़ा के वीरगांव में बराकर नदी में नाव पलटी थी. नाव 24 फरवरी की शाम 5:30 बजे आंधी में फंसकर पलटी थी. इसमें पांच व्यक्ति किसी तरह बच निकले थे. उनमें से बचे सभी 14 शवों को निकाल लिया गया. अभियान देवघर, रांची और पटना के एन डी आर एफ की टीमों और ग्रामीणों के साथ मिलकर चला.
प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक इच्छा शक्ति की असफलता
इस हादसा में नदी से चौदह बाइक और दो साइकिल भी मिले हैं. जैसे-जैसे शव बाहर निकलते गए, वैसे वैसे हर तरफ परिजनों के रोने की आवाज सुनाई देती रही. जामताड़ा जैसे पहाड़ी क्षेत्र में यह भीषण नाव दुर्घटना प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक इच्छा शक्ति की असफलता की ओर इशारा कर रहा है. यह चिंता का सबब बन गया है. इसमें ग्रामीणों की हठधर्मिता और प्रशासन की शिथिलता की पोल खोल दी है.
64 करोड़ रुपए से बना पुल का पाया चक्रवाती तूफान में हुआ क्षतिग्रस्त
बता दें कि 2009 में बराकर नदी पर धनबाद के निरसा बरबेदिया से जामताड़ा के वीरगांव तक 52 पाए वाले उच्च स्तरीय पुल का निर्माण चल रहा था. जिस पर लगभग 64 करोड़ रुपए व्यय हो चुके थे. चक्रवाती तूफान में फंस कर पुल का चार पाया क्षतिग्रस्त हो गया. राष्ट्रपति शासन के दौरान तत्कालीन राज्यपाल सिब्ते रजी ने निर्माण करने वाली कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया. जबकि निर्माणाधीन पुल की क्षतिपूर्ति का जिम्मा कंपनी उठाने के लिए तैयार थी. लिहाजा तबसे करोड़ों की लागत से बने पुल के नीचे से नाव का परिचालन होते रहा. यह सभी को खटकता था. मामला न्यायालय में चला गया. फैसला दर फैसला भी पुल का अस्तित्व नहीं लौटा पाया. यह जामताड़ा की कई पीढ़ी के लोगों को दुर्घटना के दंश का एहसास दिलाते रहेगा.
कैबिनेट मंत्री चंपई सोरेन करेंगे नए पुल का शिलान्यास
हृदय विदारक नाव दुर्घटना के बाद नए सिरे से दूसरा पुल बनवाने का र्निणय लिया गया है. जिसका शिलान्यास कैबिनेट मंत्री चंपई सोरेन करेंगे. अगले वर्ष तक पुल बनने की संभावना व्यक्त की जा रही है. बता दें कि शिलान्यास के अवसर पर स्थानीय विधायक मौके पर मौजूद रहेंगे. इसी संबंध में निर्माणाधीन पुल के पास पहुंचकर अनुमंडल पदाधिकारी, अंचल पदाधिकारी प्रखंड, विकास पदाधिकारी, थाना प्रभारी पंचायत के मुखिया और सभी ग्रामीणों ने तैयारियों का जायजा लिया.
रिपोर्ट : आरपी सिंह, जामताड़ा
