रांची (RANCHI) - छठी जेपीएससी नियुक्ति मामले में बुधवार को हाईकोर्ट के डबल बेंच में सुनवाई की गई. एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने JPSC रिजल्ट को खारिज कर दिया है. कोर्ट का यह निर्णय 326 सफल अभ्यर्थियों के लिए बहुत बड़ा आघात है. इसको लेकर छात्र नेता देवेन्द्र महतो की पहली प्रतिक्रिया सामने आई हैं. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि छात्र हित में यह एक ऐतिहासिक फैसला साबित हुआ है. सिंगल बेंच का फैसला सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि अधिकारी साजिश के तहत झारखंडी गरीब बच्चों को बीडियो-एसडीओ या किसी भी अन्य बड़े पद पर उन्हें अधिकारी नहीं बनने देते हैं. ऐसे में हाईकोर्ट ने छात्र हित में फैसला सुनाया है.
पैरवी और रिश्वत का खेल
आगे छात्र नेता देवेन्द्र महतो ने कहा कि JPSC परीक्षा में हिंदी और इंग्लिश केवल एक क्वालिफाईंग पेपर था, इसके बावजूद इसे मैरिट लिस्ट में जोड़ दिया गया. इससे ये साबित होता हैं कि सभी अधिकारी डिज़र्विंग छात्रों को वंचित रख पैरवी का खेल खेलते हैं. जो अभ्यर्थी करोड़ों की रिश्वत देते हैं, उनको पदाधिकारी बना दिया जाता है और मेरिट अभ्यर्थी को छांट दिया जाता है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेपीएससी में बिना सुधार किए सभी को ज्वाइन करवा दिया था और आज दूध का दूध पानी का पानी हो गया. परीक्षा में पहले अभ्यर्थियों को कार्बन कॉपी दी जाती थी, जिससे छात्रों को उनके सही अंक जानने में सहुलियत होती थी. लेकिन अब उसको भी बंद कर दिया गया है. जिससे छात्रों को पता ही नहीं चल पाता कि उन्हें कितना मार्क्स आ रहा है. ऐसे में वो अपनी हक की लड़ाई लड़ पाने में असहाय हो जाते हैं.
रोजगार का सपना
देवेन्द्र महतो ने बताया कि सुधीर त्रिपाठी को गैर संवैधानिक तरीके से जेपीएससी का चेयरमैन बना दिया गया. इसके कारण सरकार को उन्हें जेल भेजना चाहिए. साथ ही ऐसे अवैध तरीके से नियुक्त हुए सभी अधिकारियों को सजा होनी चाहिए. अंत में छात्र नेता ने कही कि जिन नेताओं को लगता है कि झारखंड सिर्फ नेताओं के लिए ही बना है, वे बिल्कुल गलत है. बल्कि झारखंड उन तमाम गरीब बच्चों और लोगों के लिए बना है जिनको सरकार से रोजगार की उम्मीद है. कोई भी सरकार हो चाहे वह बाबूलाल मरांडी की हो या अर्जुन मुंडा की हो या फिर हेमंत सोरेन की हो. अगर झारखंड नहीं बनता तो यहां एक भी नेता नहीं बनता. आज झारखंड बना है तभी नेता मंत्री और विधायक बन रहे हैं. यहां के गरीब किसान मजदूर जो पढ़ाई करते हैं, उनका सपना है कि उन्हें रोजगार मिले. जिसके लिए उनके मां-बाप कष्ट से पैसे जमाकर उनको स्कूल और कॉलेज भेजने हैं.