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"झारखंड में बाहरी भाषा नहीं चलेगी, खोरठा को राज्यभाषा का दर्जा मिले"

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 11:35:14 AM

चतरा (CHATRA)-  प्रदेश में सियासी भाषा विवाद का भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. भाषा विवाद के आग की लपटें अब चतरा तक पहुंच चुकी हैं. चतरा में भी 1932 का खतियान अविलंब लागू करने व प्रदेश की अपनी भाषा खोरठा को राज्यभाषा का दर्जा देने की भी मांग उठने लगी है. झारखंडी जनसंघर्ष मोर्चा के बैनर तले समर्थकों व कार्यकर्ताओं ने जिले के गिद्धौर प्रखंड मुख्यालय में गुरुवार को जनाक्रोश रैली निकाली. रैली के माध्यम से सरकार से राज्य में 1932 का खतियान लागू करने और भोजपुरी, मगही व अंगिका भाषा के स्थान पर झारखंड में झारखंड की अपनी भाषा खोरठा को राज्य भाषा का दर्जा देने की मांग की.

1932 का खतियान हमारी पहचान

आन्दोलनकारियों ने कहा कि झारखंड में बाहरी भाषा नहीं चलेगी. 1932 का खतियान हमारी पहचान है. हेमंत सरकार को इसे हर हाल में लागू करना होगा. रैली की शुरुआत गिद्धौर मुख्य चौक से हुई, जहां आंदोलकारियों ने भगवान बिरसा की पूजा अर्चना कर पदयात्रा शुरू की. मुख्य चौक से ब्लॉक मोड़ होते सूर्य मंदिर परिसर में भीड़ जनसभा में तब्दील हो गयी. यहां आंदोलकारियों व समर्थकों ने झारखंड की अस्मिता के लिए झारखंडी भाषा खोरठा को अविलंब लागू करने की मांग की. कहा कि सभी राज्यों की अपनी भाषा है, लेकिन यहां की भाषा को उचित तरजीह न देकर दूसरे राज्यों की भाषा को सरकार प्रदेशवासियों पर थोप रही है. 1932 का खतियान लागू होने पर ही मूलनिवासियों को उनका वाजिब हक मिल पायेगा. नेताओं को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राज्य हित के बारे में सोचने की जरूरत है. जो झारखंड की बात करेगा, वही झारखंड पर राज करेगा.

रिपोर्ट : संतोष कुमार, चतरा

Tags:News

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