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राष्ट्रपति से मिले भाजपा-आजसू के सांसद-विधायक, क्षेत्रीय भाषा की सूची से मगही, भोजपुरी और अंगिका हटाने का किया आग्रह

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 9:18:18 AM

बोकारो (BOKARO) - गिरिडीह के सांसद चंद प्रकाश चौधरी, जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो, पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, और गोमिया के विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की. इन नेताओं ने संयुक्त रुप से राष्ट्रपति को झारखंड सरकार द्वारा राज्य के बोकारो और धनबाद जिले में भोजपुरी, और मगही और अन्य जिले में मैथिली और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने पर चल रहे व्यापक आंदोलन और इसको लेकर लोगों में व्याप्त आक्रोश से अवगत कराया. साथ ही उनसे इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची से हटाने और झारखंड की 9 जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को ही क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में शामिल कराने का आग्रह किया.

कुडमी को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का अनुरोध

इस क्रम में राष्ट्रपति से झारखंड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा की टोटेमिक कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने आग्रह करते हुए उन्हें इस बात से अवगत कराया कि 1913 से 1931 की अधिसूचना में टोटेमिक कुड़मी को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया था. मगर 1950 में राजनीति कारणों से टोटेमिक कुड़मी को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटा दिया गया. इसको देखते हुए पुनः टोटेमिक कुड़मी अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करना श्रेयस्कर रहेगा. मिलने आए तीनों सांसदों और विधायक ने राष्ट्रपति को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेसीएससी) में व्याप्त अनियमितता की बोल बाला की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराया. साथ ही उन्होंने बताया कि सातवीं लेकर दसवीं जेपीएससी में व्यापक रुप से अनियमितता बरती गयी है. इसका उच्च स्तरीय जांच जरा करा कर भारतीय संविधान के अनुछेद 317 के तहत दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई किया जाना आवश्यक है.

पिछड़ी जाति को मिले 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ

राष्ट्रपति को इस बात से भी अवगत कराया गया कि झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग में 1 अगस्त 2021 जो कट ऑफ डेट रखा गया है, वह व्यावहारिक नहीं है.  इस लिहाज से 2015 के विज्ञापन में निर्धारित कट ऑफ डेट को रखने की जरूरत है. साथ ही राष्ट्रपति को यह भी बताया गया कि झारखंड में पिछड़ी जाति आबादी 55 फीसदी है. ऐसे में पिछड़ी जाति 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए. राष्ट्रपति को इन नेताओं ने अलग-अलग ज्ञापन भी सौंपा. राष्ट्रपति ने ध्यान पूर्वक बातों को भी सुना और समुचित कार्रवाई करने को लेकर आश्वस्त भी किया.

रिपोर्ट : संजय कुमार, बोकारो (गोमिया)

Tags:News

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