पलामू (PALAMU) - पलामू में पहाड़ों के बीच जिस बंजर जमीन पर कभी नक्सलियों की जनअदालत लगती थी, पंचायत होती थी, वहां आज फिजाओं में बदलाव आया है. उस बंजर जमीन पर पलामू के एक किसान ने हरित क्रांति ला दी है. ये दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है.
60 एकड़ में लगे थाईलैंड के अमरुद के पौधे
पलामू के इस बंजर जमीन पर 60 एकड़ में लगे यह पौधे थाईलैंड के अमरुद के पौधे हैं. जो महज डेढ़ साल में ही अच्छे फल देने लगे हैं. यह नजारा जिले के हरिहरगंज प्रखंड के सरसोत पंचायत के कटकोंभा गांव का है. किसान अजय कुमार मेहता ने अपने कुछ दूसरे किसान साथियों के साथ थाईलैंड के अमरूद की बागवानी की है और लाखों की कमाई भी कर रहे हैं. अजय मेहता जिले नहीं बल्कि प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बने. 60 एकड़ में लगे थाईलैंड के अमरूद अच्छे नस्ल के हैं. फल भी काफी अच्छे हैं. किसान अजय मेहता की माने तो वैज्ञानिक विधि से खेती करने की प्रेरणा नेट के माध्यम से और बिहार के एक किसान दोस्त से मिली.
2017 में की थी शुरुआत
यह थाईलैंड नस्ल का पौधा आंध्र प्रदेश से लाया गया है. दूसरे किसानों से जुड़कर अजय मेहता ने इस बागवानी की शुरुआत की है. इसकी शुरुआत 2017 में की गई थी. जबकि अब तक दूसरी बार फल दे रहा है. वह भी अच्छी किस्म का जो बाजारों में महंगे दामों में बिकने के लिए जा रहा है. इस बागवानी की शुरुआत अजय मेहता ने अपने एक किसान मित्र सत्येंद्र के साथ की है. टपक सिंचाई से बागवानी को पानी मिलता है और ढाई फीट के पौधे से ही 4 से 5 केजी अमरुद निकलने लगा है.
इस बागवानी से हुई 40 लाख तक की कमाई
अजय मेहता ने खेती की शुरुआत की है तो आसपास के कई ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है. वह इस बागवानी में दिन रात मेहनत करते हैं, जिसके बदले उन्हें मेहताना भी मिलता है. अमरुद झारखंड के अलावे बिहार के भी कई जिलों में भेजे जाते हैं. तोड़ने के बाद उसे पैकेट में पैक कर वाहनों से भेजा जाता है. अब तक अजय इस बागवानी से 40 लाख तक की कमाई कर चुका है. आसपास के इलाके के लोग भी यहां अमरुद खरीदने आते हैं तो भौचक रह जातें हैं. कम हाइट में इतनी उच्च क्वालिटी का मीठा अमरुद लोगों को आकर्षित करता है. इतना ही नहीं खुद पलामू प्रमंडलीय आयुक्त जटाशंकर चौधरी ने भी इस बागवानी को देखने पहुंचे थे और तारीफ करते हुए सरकारी हर संभव मदद देने की भी बात कही. वाकई में हौसला बुलंद हो तो कुछ भी करना संभव हो जाता है. कभी इस जमीन पर नक्सली जन अदालत लगते थे. यह जमीन बंजर थी. मगर आज इस किसान की मेहनत ने इलाके में हरित क्रांति ला दी है. जरूरत है कि ऐसे किसानों को सरकारी मदद मिले. ताकि पलामू जिले के किसान भी प्रेरित होकर इस खेती से जुड़ सकें.
