देवघर (DEOGHAR) - बसंत पंचमी का पावन पर्व देश भर में विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के रुप में मनाया जाता है. लेकिन देवघर के विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर में आज का दिन बाबा बैद्यनाथ के तिलकोत्सव के रुप में मनाया जाता है. तिलक का यह रस्म अदा करने मिथिलांचल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बड़े-बड़े कांवर लेकर बाबा धाम पहुंचते हैं. इसी के तहत आज अहले सुबह से ही बाबा मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ जुटी है और यह भीड़ खास कर मिथिलांचल से बाबा के तिलकोत्सव में शामिल होने आये श्रद्धालुओं की है. श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के दिन बाबा का जलाभिषेक करने देवघर आते हैं.
बसंत पंचमी के दिन से ही होली की शुरुआत
विशेष प्रकार के कांवर, वेश-भूषा और भाषा से अलग पहचान रखने वाले ये मिथिलावासी अपने को बाबा का संबंधी मानते हैं और इसी नाते आज के दिन बाबा के तिलकोत्सव में शामिल होने देवघर आते हैं. उनकी मानें तो आज से ही होली की भी शुरुआत हो जाती है. यहां के तीर्थपुरोहितों की मानें तो बसंत पंचमी के अवसर पर मिथिलांचल के लोगों द्वारा देवाधिदेव महादेव को तिलक चढाने की अति प्राचीन परम्परा रही है. कई टोलियों में आए ये मिथिलावासी शहर के कई जगहों पर इकठ्ठा होते हैं और बड़ी श्रद्धा से पूजा-पाठ, पारंपरिक भजन-कीर्तन कर बाबा के तिलकोत्सव में शामिल होते हैं. इसी ख़ुशी में ये आपस में अबीर-गुलाल खेल कर खुशियां बांटते हैं ,एक-दूसरे को बधाइयां देते हैं. उनकी मानें तो बसंत पंचमी के दिन से ही होली की भी शुरुआत हो जाती है.
बाबा को विवाह में शामिल होने का देते हैं निमंत्रण
बसंत पंचमी के अवसर पर सुलतानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा से एक विशेष तरह के कांवर में जल भर कर मिथिलांचल के ये श्रद्धालू देवघर पहुंचते हैं और बाबा को हिमालय पुत्री मां पार्वती के विवाह में शामिल होने का निमंत्रण दे कर वापस अपने घर लौटते हैं. कोरोना पावंदियों के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबाधाम पहुंचे हैं.
रिपोर्ट : रितुराज सिन्हा, देवघर
