धनबाद (DHANBAD)- झारखंड मुक्ति मोर्चा (झमुमो) ने अपना 50 वां स्थापना दिवस शुक्रवार को धनबाद में मनाया. झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना 4 फरवरी 1973 को धनबाद में ही हुई थी. लेकिन इस वर्ष कोविड को देखते हुए कार्यक्रम को बहुत संक्षिप्त रखा गया था. पिछले साल भी कोविड के कारण स्थापना दिवस में बहुत तामझाम नहीं किया गया था. आज के कार्यक्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा के कोई बड़े नेता शामिल नहीं हुए जबकि एक दिन पहले 2 फरवरी को दुमका में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में पार्टी के अध्यक्ष शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए थे. उनके शामिल नहीं होने से यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कोयलांचल से दूरी बना ली है, क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा का पूरा ध्यान संथाल के जिलों पर है.
चुनाव के पूर्व के सारे वादे पूरे होंगे
आज के कार्यक्रम में बोलते हुए टुंडी के झामुमो विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि धनबाद और बोकारो में जो भाषा विवाद को हवा दी जा रही है, यह सब भाजपा और आजसू की करतूत है. नौजवानों को यह बात समझनी चाहिए और उन्हें अपने को भटकने नहीं देना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि झामुमो नियोजन नीति भी लाएगा और स्थानीय नीति भी बनाएगा. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार ने स्थानीय लोगों को 75% नौकरी में आरक्षण देने का निर्णय किया है और हम चुनाव के पहले जो भी वायदे किए थे, उसे पूरा करने के लिए कटिबद्ध हैं. अभी सरकार के पास समय है. बचे हुए समय में सारे वादे पूरे कर लिए जाएंगे. उन्होंने नौजवानों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में आकर भटके नहीं ,मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया है कि धनबाद, बोकारो में भी भोजपुरी ,अंगिका जैसी भाषाओं को निरस्त किया जाएगा और यह काम कोई भी रिक्तियां निकलने के पहले ही कर लिया जाएगा, इसलिए युवा सचेत रहे.
विपक्षियों में खलबली मची हुई है
झामुमो के धनबाद जिला अध्यक्ष रमेश टुडू ने कहा कि कोविड के कारण कार्यक्रम बड़े पैमाने पर गोल्फ मैदान में करने के बजाय इसे प्रखंडों में शिफ्ट कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के कुशल नेतृत्व में झारखंड लगातार विकास कर रहा है और यही वजह है कि विपक्षियों में खलबली मची हुई है. उनका दावा है कि भाजपा और आजसू को झारखंड की जनता ने नकार दिया है और आगे भी नकारती रहेगी.
रिपोर्ट: सत्य भूषण सिंह ,धनबाद
