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डेढ़ करोड़ रुपए के गबन के आरोपी की मौत के मामले में पुलिस के हाथ खाली, CBI जांच की मांग

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 10:11:07 AM

दुमका (DUMKA) – बीते 31 जनवरी की देर रात दुमका के ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के पत्राचार लिपिक दीप कुमार श्रीवास्तव की हत्या कर दी गई. वहीं 1 फरवरी की सुबह उसका शव डांगलपाड़ा में सड़क किनारे पड़ा मिला. स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस ने शव को कब्जे में लिया. हत्या की सूचना दीप के परिजनों को दी गई. परिजन रांची से दुमका पहुंचे. परिजनों ने दुमका पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. साथ ही दीप कुमार की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है.

संतोष के साथ था दीप

परिजनों का कहना है कि ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल में हुए एक करोड़ 42 लाख रुपए के गबन मामले में केस को रफा दफा करने के उद्देश्य से ₹700000 की मांग की थी. विभाग के तमाम कर्मियों ने चंदा एकत्रित कर ₹700000 इकट्ठा किया था, जिसमें दीप के द्वारा भी ₹50000 दिया गया था. परिजनों ने यह भी बताया कि 31 जनवरी की शाम दीप की अपनी पत्नी से बात हुई थी जिसमें दीप ने बताया था कि वह संतोष के साथ है. 1 फरवरी की सुबह दीप का शव मिला. परिजनों के बयान पर अब पुलिस संतोष की तलाश कर रही है. लेकिन अभी तक इस मामले में पुलिस के हाथ खाली हैं.

राजनीति रेस

लिपिक दीप कुमार श्रीवास्तव के हत्या को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है. दुमका पहुंचे दीप के परिजनों से पूर्व कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने मुलाकात की. उन्होंने हत्या का तार गबन मामले से जुड़े होने की आशंका जताई है. साथ ही पूरे मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग भी की है. उन्होंने कहा है कि तभी परिजनों को न्याय मिल पाएगा.

क्या है पूरा मामला

बता दें कि नवंबर 2021 में दुमका के ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल में एक करोड़ 42 लाख रुपए का गबन हुआ था और विभाग द्वारा इसकी प्राथमिकी नगर थाना में दर्ज कराई गई थी. दरअसल पुल निर्माण करने वाली एबीसी कंस्ट्रक्शन के खाते में जो एक करोड़ 42 लाख रुपए जाना था, वह राशि हरियाणा के जीके इंटरप्राइजेज के खाते में चली गई. इस मामले के अनुसंधान में अभी तक दुमका पुलिस बैकफुट पर ही नजर आई है. पुलिस ने सबसे पहले विभाग के रोकड़ पाल पंकज वर्मा और कंप्यूटर ऑपरेटर पवन गुप्ता को गिरफ्तार कर बगैर मीडिया के सामने रखे जेल भेज दिया. उसके बाद पुलिस ने जीके इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर राजेश कुमार को भी गिरफ्तार किया जिसके खाते में रुपए गया था. गिरफ्तारी के पश्चात उसे भी आनन-फानन में जेल भेज दिया गया. पुलिस राजेश कुमार को ही मुख्य आरोपी मान रही थी. लेकिन विश्वस्त सूत्रों की माने तो पुलिस के समक्ष राजेश ने बताया कि 10% कमीशन पाने के लिए अपने खाते में राशि मंगाया था. राशि आते ही तमाम राशि दूसरों के खाते में चली गई. राजेश ने दो व्यक्ति का नाम भी पुलिस को बताया अब पुलिस उन दोनों व्यक्तियों की तलाश में जुटी है लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई. इसी बीचदीप श्रीवास्तव की हत्या हो जाती है. अब इसे महज संयोग कहें या साजिश लेकिन परिजन से लेकर आम लोग तक इस हत्याकांड को गबन से जोड़कर देख रहे हैं. वैसे अभी अनुसंधान जारी है इसलिए पुलिस इस मामले पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है. वहीं ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता उदय कुमार सिंह ने 7 लाख रुपए रुपए इकठ्ठा करने के आरोप को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि पुलिस को इस बिंदु पर भी अनुसंधान करनी चाहिए.

रिपोर्ट : पंचम कुमार झा, दुमका

 

 

 

Tags:News

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