दुमका(DUMKA)- उन मासूमों को अहसास भी नहीं कि जन्म लेते ही उन पर सितम बरसेंगे. जन्म के साथ ही दोनों नवजात बच्चियों के सिर से मां चिंता देवी का साया उठ गया. पिता सुभाष सिंह तो फर्ज से विमुख हो पत्नी का शव व दोनों बच्चियों को छोड़कर भाग गया. मकान मालिक निरंजन महतो ने सुभाष के घर व ससुराल वालों से संपर्क किया, किसी ने अंतिम संस्कार के लिए हामी नहीं भरी. तब नगर पंचायत को जानकारी दी गई. इसके बाद अंतिम संस्कार हुआ. चिंता की चिता को पति के हाथों आग भी नहीं मिली. बच्चियों का ध्यान मकान मालकिन रिंकू देवी रख रही हैं.
नवजात दोनों बेटियों और पत्नी का शव छोड़ फरार हुआ पति
हमारी संस्कृति में रिश्तों की अत्यधिक महत्ता है. बावजूद इस घटना से समाज को शर्मसार कर दिया है. बासुकीनाथ रेफरल अस्पताल इलाके में रहने वाली रिंकू देवी ने बताया कि सरैयाहाट के लोडिया निवासी सुभाष अपनी पत्नी के साथ उनके यहां किराए पर रहने आया था. सुभाष दैनिक मजदूर था. शनिवार को चिंता देवी ने दो बच्चियों को जन्म दिया. शनिवार देर रात जरमुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूता की हालत बिगड़ी, इसके बाद उसकी मौत हो गई. दाह संस्कार रविवार सुबह करने का निर्णय हुआ. सुबह छह बजे ही सुभाष सिंह शव व दोनों बच्चियों को मकानमालिक के भरोसे छोड़ भाग गया. दोपहर तक उसका इंतजार करते रहे. मकान मालिक ने सोचा सुभाष अपनी पत्नी के दाह संस्कार के लिए रुपये का इंतजाम करने गया होगा. जब वह नहीं लौटा तो उसके घरवालों एवं चिंता देवी के मायके वालों से बात की गई. दोनों परिवारों ने दाह संस्कार करने व बच्चियों को पालने से इन्कार कर दिया. इसके बाद कृषि मंत्री बादल पत्रलेख को जानकारी दी. उन्होंने कुछ आर्थिक सहायता भेजी. पुलिस ने भी चिंता देवी के मायके व ससुराल वालों से संपर्क किया. दोनों परिवारों ने पुलिस की भी नहीं सुनी. रविवार की शाम नगर पंचायत की मदद से शव का अंतिम संस्कार किया गया. रिंकू दोनों बच्चियों की देखभाल कर रही हैं. क्षेत्र के मनोरंजन झा व बाटुल झा ने दोनों बच्चियों को जिला प्रशासन को अपने संरक्षण में लेने की मांग की है.
बच्चियों को ममता की छांव देने बढ़े हाथ
नवजात बच्चियों की मां की मृत्यु होने और पिता के द्वारा छोड़े जाने की सूचना पर कुछ लोग आगे आए, ताकि उनको ममता की छांव दे सकें, गोद दे सकें. मगर रिंकू देवी का कहना था कि बच्चियों को जिला प्रशासन को देंगे. ताकि नियमों की परिधि में ही मासूमों को किसी को सौंपा जाए.
रिपोर्ट: सुतिब्रो गोस्वामी, दुमका(बासुकीनाथ)
